{"_id":"57c1c4534f1c1bb57ed4fdef","slug":"the-granddaughter-grandmother-lit-the-pyre","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोती ने दी दादी की चिता को मुखाग्नि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोती ने दी दादी की चिता को मुखाग्नि
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
Updated Sat, 27 Aug 2016 10:18 PM IST
विज्ञापन
दादी की चिता को मुखाग्नि देने पहुंची पोती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिलाएं तमाम रूढ़िवादी विचारों, मान्यताओं को ठेंगा दिखाते हुए आगे बढ़ रही हैं। ऐसी ही एक महिला ने अपनी दादी की चिता को मुखाग्नि देकर समाज के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है।
विज्ञापन
ग्राम भन्यूड़ा (हिनकोट) की माधवी देवी (90) लंबे समय से बीमार थीं। शुक्रवार को इलाज कराकर खटीमा से लौट रहीं माधवी देवी की पिथौरागढ़ के पास मृत्यु हो गई। परिजन माधवी देवी के शव को घर लाए। माधवी देवी के सेना में कार्यरत इकलौते पुत्र पुष्कर सिंह 25 साल पहले देश की सुरक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। गांव में माधवी देवी को मुखाग्नि कौन देगा, इस पर बात होने लगी।
विज्ञापन
माधवी देवी की एकलौती पोती शिक्षिका विमला पानू ने दादी की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। विमला के हौसले के सामने सबको सहमति जतानी पड़ी। हिंदू समाज में महिलाओं का मुखाग्नि देना तो दूर शवयात्रा में भी शामिल होना भी वर्जित बताया जाता है। शनिवार को जौलजीबी श्मशान घाट पर विमला ने दादी की चिता को मुखाग्नि दी।
विज्ञापन