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माइग्रेशन पर जाने वालों का अंतिम जत्था भी रवाना

Sun, 06 Dec 2015 04:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 06 Dec 2015 04:32 PM IST
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The final batch dispatched on migration goers

उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों से तराई की ओर जाने का इस सीजन का क्रम अब पूरा हो रहा है। रविवार को मुनस्यारी के मिलम गांव से पूरे एक माह का सफर तय कर अंतिम जत्था थल पहुंचा। शनिवार की रात भेड़ों के साथ इस जत्थे ने पातलथौड़ में रात बिताई। रविवार की सुबह यह अगले पड़ाव को रवाना हो गए। एक दिन में यह लोग 11 से 15 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। इस माह के अंत तक यह तराई के जंगलों में पहुंच जाएंगे। अप्रैल में इनकी मूल गांवों को वापसी होगी। इस जत्थे के साथ करीब 500 भेड़ें हैं। यह लोग ऐसे स्थान पर पड़ाव बनाते हैं जहां बकरियों को चरने के लिए घास मिल जाए।

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जत्थे के साथ जा रहे कुंवर सिंह, धन सिंह ने बताया कि रात के समय भेड़ों की पहरेदारी करनी पड़ती है। जंगली जानवर भेड़ों पर हमला न करें इसका पूरा ध्यान दिया जाता है। जत्थे के साथ कुत्ते भी रहते हैं। ताकि वह रात के समय किसी खतरे से अलर्ट कर दें। माइग्रेशन पर जाने का यह क्रम अतीतकाल से चला आ रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरने लगती है। मुख्य समस्या जानवरों के चारे की होती है। यह लोग अपने मकानों में ताला डाल आए हैं। दो चार लोग गांव में पहरेदारी के लिए रहते हैं।
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