{"_id":"5ab6862f4f1c1ba6768b7635","slug":"the-dirty-water-coming-again-in-the-tapes","type":"story","status":"publish","title_hn":"नलों में फिर आ रहा गंदा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नलों में फिर आ रहा गंदा पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:39 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़ के भवानीगंज में स्टेंडपोस्ट से पानी भरतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठुलीगाड़ पेयजल योजना के जरिये नगर में सीवरयुक्त पानी की आपूर्ति का मामला अभी शांति भी नहीं हुआ है कि फिर से गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें आ रही हैं। लोगों ने गंदे पानी की आपूर्ति के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
शनिवार को लगातार दूसरे दिन पिथौरागढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों से गंदा पानी आने की शिकायत मिली। सिमलगैर, नगरपालिका जोन, दौला, लिंठ्यूडा आदि क्षेत्रों में गंदा पानी आया। लोगों ने नलों से पीने का पानी ही नहीं भरा। पानी इतना गंदा था कि कपड़े, बर्तन धोने तक में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पानी के टैंकों की सफाई अलग करनी पड़ी। जरूरत पर लोगों को नौले, धारे की शरण लेनी पड़ी। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रशासन के समक्ष उठाई है।
विज्ञापन
सीमांत यूथ मोर्चा ने प्रतिदिन पानी की बॉयोलाजिकल जांच की मांग की है। दूसरी ओर जल संस्थान आंवलाघाट पेयजल योजना के ट्रायल के दौरान गंदा पानी आने की दलील देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। जल संस्थान के ईई विशाल सक्सेना का कहना है कि क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन भी गंदे पानी की आपूर्ति का कारण हो सकती है। योजनाओं में गड़बड़ी का पता लगाने के लिए स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा।
विज्ञापन
दूषित जल आपूर्ति में नहीं हुई कार्रवाई
दूूषित जल की आपूर्ति के मामले में अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई न होने से क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। पानी के नमूनों के साथ ही विभागीय जांच हुई। इसके साथ ही मामला पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड और एनजीटी तक पहुंचा, लेकिन अब तक किसी भी मामले में कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
35 हजार को दूसरे दिन मिल रहा पानी
पेयजल मंत्री के गृहनगर की 35 हजार की आबादी को दूसरे दिन पानी मिल रहा है, जबकि नगर की 70 हजार से अधिक जनसंख्या को प्रतिदिन 12 एमएलडी पानी की दरकार है। ठुलीगाड़ और घाट पंपिंग योजना आदि के जरिये रोजाना छह एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। मार्च के आखिर में ही हालात यह है कि रोटेशन के आधार पर आपूर्ति करनी पड़ रही है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग नौलों, धारों, स्टैंड पोस्ट से पानी भर रहे हैं।