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Pithoragarh: खूबसूरत परीताल तक पहुंचने में रोक रहा नियमों का ब्रेकर, कभी दुनिया भर में थी पहचान; अब गुमनाम

Wed, 09 Jul 2025 01:38 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 09 Jul 2025 01:38 PM IST
सार

खूबसूरत परीताल पिछले तीन दशक से पर्यटकों का इंतजार कर रही है। अनुमति नहीं मिलने के कारण पर्यटक यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। कभी दुनिया भर में पहचान रखने वाले इस ट्रेकिंग रूट पर आवागमन की अनुमति मिल जाती तो यह उत्तराखंड का सबसे बेहतरीन ट्रेक रूट होता।

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The breaker of rules is stopping you from reaching Parital Pithoragarh
परीताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिलम-मलारी ट्रेक पर स्थित खूबसूरत परीताल पिछले तीन दशक से पर्यटकों का इंतजार कर रही है। अनुमति नहीं मिलने के कारण पर्यटक यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। कभी दुनिया भर में पहचान रखने वाले इस ट्रेकिंग रूट पर आवागमन की अनुमति मिल जाती तो यह उत्तराखंड का सबसे बेहतरीन ट्रेक रूट होता।

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मुनस्यारी के मिलम से मलारी ट्रेक रूट कभी नंदा देवी और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ा मार्ग था। उंटाधूरा दर्रे से गुजरने वाला यह प्राचीन ट्रेक न केवल व्यापार और तीर्थयात्रा का साधन था बल्कि भारत-तिब्बत की सांस्कृतिक साझेदारी का प्रतीक भी था। इस उंटाधूरा मार्ग पर खूबसूरत परीताल तो है ही ल्वां, पांछू, तिम्फू और मिलम ग्लेशियर भी यहीं स्थित हैं। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग बंद हो गया। हालात सामान्य होने के बाद 1990 तक पर्यटकों की आवाजाही होती थी लेकिन इसके बाद सुरक्षा कारणों से इस रूट को बंद कर दिया गया। तब से यहां पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। साहसिक पर्यटन से जुड़े स्थानीय ट्रेकर नरेंद्र कुमार के अनुसार इस ट्रेक से लगभग सात से दस दिनों में यह दूरी तय हो जाएगी। इस ट्रेक रूट से कुमाऊं और गढ़वाल के आपस में जुड़ने से दोनों मंडलों के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलते।

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परीताल को पार्वती ताल भी कहा जाता है
मुनस्यारी टूर ऑपरेटर्स और साहसिक पर्यटन से जुड़े नरेंद्र कुमार बताते हैं कि मिलम-मलारी ट्रेक रूट पर कई स्थल बेहद खूबसूरत हैं। लगभग 5400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित परीताल भी इन्हीं खूबसूरत स्थलों में शुमार है। मान्यता है कि जब भगवान शिव कैलाश मानसरोवर जा रहे थे तब पार्वती ने इस सरोवर में स्नान किया था। इस कारण इसे पार्वती ताल भी कहा जाता है। इससे यह सरोवर लोगों की श्रद्धा का केंद्र भी है।

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प्रधानमंत्री मोदी को भेजा पत्र
मुनस्यारी टूर ऑपरेटर्स की ओर से मिलम-मलारी ट्रेक रूट को पर्यटकों के लिए खोले जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। टूर ऑपरेटर्स के सदस्यों का कहना है कि अब मिलम तक सड़क बन चुकी है। ग्लेशियर के कारण मिलम विश्व प्रसिद्ध स्थल है। यदि यह ट्रेक रूट खुल जाए तो दुनिया भर से पर्यटक यहां आएंगे। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

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