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छह महीने के भीतर दस परिवारों ने गांव छोड़ा

Sat, 16 Dec 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sat, 16 Dec 2017 10:14 PM IST
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Ten families left the village within six months
पलायन के कारण सन्नाटे में डूबा डीडीहाट का चौंसाल गांव - फोटो : अमर उजाला

डीडीहाट तहसील के चौंसाल गांव से पिछले छह महीने के भीतर दस परिवार गांव छोड़कर जा चुके हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार लोगों को गांवों में वापस बुलाने की बात कर रही है। गांवों में शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। स्थानीय स्तर पर रोजगार की कोई संभावना न होने से युवा नौकरी की तलाश में गांव छोड़कर दूर शहरों की ओर निकल जाते हैं। अब तो असुविधाओं का सामना कर रहे लोगों ने भी गांव से जाना शुरू कर दिया है।

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चौंसाल पहले चहल-पहल वाला गांव था। गांव में 107 परिवार रहते थे। अब गांव में गरीब तबके के 50 परिवार ही रह गए हैं। पहले गांव में मतदाताओं की संख्या 1082 थी। अब यह सिमटकर 312 रह गई है। गांव के लोगों का कहना है कि पूरे इलाके में चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। भागीचौरा अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टर नहीं है। मरीजों को यहां से 70 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है।
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गांव के सामाजिक कार्यकर्ता भरत सिंह ऐरी ने कहा कि गांवों से पलायन के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। राज्य गठन के बाद भी गांवों में सुविधा जुटाने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। परेशान लोगों ने इससे तो खटीमा, टनकपुर, हल्द्वानी में जाकर बसना उचित समझा। ऐरी बताते हैं कि चौंसाल गांव में अब सिर्फ गरीब तबके के लोग ही रह गए हैं। इनमें से मध्यम आय वाले पांच परिवारों ने भी गांव छोड़ने की तैयारी कर ली है। यह परिवार भी किसी समय गांव छोड़कर जा सकते हैं।
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चौंसाल गांव तक पहुंच चुकी है सड़क
भागीचौरा से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित चौंसाल गांव तक आठ साल पहले सड़क पहुंच चुकी थी, लेकिन सड़क पहुंचने के बावजूद लोगों की तकलीफों में कोई कमी नहीं आई। गांव के लोगों का कहना है कि सिर्फ सड़क बनने से विकास का पैमाना तय नहीं होता। आज लोगों को सबसे पहले शिक्षा और चिकित्सा की जरूरत होती है। सामाजिक कार्यकर्ता भरत सिंह ऐरी का कहना है कि पहाड़ के गांवों में खेतीबाड़ी भी चौपट होती जा रही है।

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