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Pithoragarh News: दिन में खड़ी और रात में बैठकी होली शुरू
Fri, 03 Mar 2023 10:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 03 Mar 2023 10:57 PM IST
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पिथौरागढ़। एकादशी का रंग पड़ने के साथ ही सीमांत के गांवों में खड़ी होली की धूम शुरू हो गई है। हालांकि अभी बाहर रहने वाले लोग घरों में नहीं पहुंचे हैं लेकिन रविवार से खड़ी होली पूरे शबाब पर आ जाएगी। दिन में खड़ी और रात को होल्यार बैठकी होली की महफिल का आनंद उठा रहे हैं।
लोक संस्कृति के जानकार पूर्व प्रधानाचार्य पदमादत्त पंत (87) बताते हैं कि ढोल, नगाड़े, झांझ की थाप पर खड़ी होली गायन होता है। पहले महंत होली के बोल गाते हैं। इसके बाद होल्यारों के दो दल बारी-बारी से होली गायन करते हैं। धार्मिक होली गीत जिन्हें वेदांती भी कहा जाता है से होली गायन शुरू किया जाता है।
इन होली बोलों में भगवान गणेश और शिवजी की स्तुति में गीत गाए जाते हैं। देवी की स्तुति में कां देवी को तेरो थान, कां देवि आली भवानी, तुम तो भई तपवान कालिका कलयुग में अवतार लिया, गाई जाती हैं। रामायण आधारित बोलों में अच्छा हां रे सीता वन में अकेली कैसी रही, श्रीकृष्ण की लीला से संबंधित अंचरा मेरो छोड़ श्याम मेरि गैया चली वृंदावन को, पौराणिक होलियों में किस विधि आज्ञा देहुं लाल रे बाली उमरिया तेरी है गाई जाती हैं।
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शृंगार रस जिन्हें बंजारा होली कहा जाता है इनके बोलों में अच्छा हां रे गोरी नैना तुम्हारे रसा भरे, आपुं वन जारो बन जो गयो वन जारोछ, आंगन नीम लगाय पिया वन जा रोछ, आदि गाई जाती हैं।
देवर-भाभी और प्रेमी-प्रेमिका के गीत भी हैं लुभावने
पिथौरागढ़। होली में हंसी-ठिठौली भी खूब होती है। देवर-भाभी और प्रेमी-प्रेमिका से संबंधित गीत भी खूब गाए जाते हैं। इनमें चल उठो पछैया मेघ देवर सब रंग भीजे चुनरी, तू कर ले अपनो ब्याह देवर हमरो भरोसो जन करिए, तेरे नैना रसीले यार बालम प्रीति लगा ले नैनन से, पर युवा होल्यार खूब मस्त रहते हैं।
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लोक संस्कृति के जानकार पूर्व प्रधानाचार्य पदमादत्त पंत (87) बताते हैं कि ढोल, नगाड़े, झांझ की थाप पर खड़ी होली गायन होता है। पहले महंत होली के बोल गाते हैं। इसके बाद होल्यारों के दो दल बारी-बारी से होली गायन करते हैं। धार्मिक होली गीत जिन्हें वेदांती भी कहा जाता है से होली गायन शुरू किया जाता है।
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इन होली बोलों में भगवान गणेश और शिवजी की स्तुति में गीत गाए जाते हैं। देवी की स्तुति में कां देवी को तेरो थान, कां देवि आली भवानी, तुम तो भई तपवान कालिका कलयुग में अवतार लिया, गाई जाती हैं। रामायण आधारित बोलों में अच्छा हां रे सीता वन में अकेली कैसी रही, श्रीकृष्ण की लीला से संबंधित अंचरा मेरो छोड़ श्याम मेरि गैया चली वृंदावन को, पौराणिक होलियों में किस विधि आज्ञा देहुं लाल रे बाली उमरिया तेरी है गाई जाती हैं।
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शृंगार रस जिन्हें बंजारा होली कहा जाता है इनके बोलों में अच्छा हां रे गोरी नैना तुम्हारे रसा भरे, आपुं वन जारो बन जो गयो वन जारोछ, आंगन नीम लगाय पिया वन जा रोछ, आदि गाई जाती हैं।
देवर-भाभी और प्रेमी-प्रेमिका के गीत भी हैं लुभावने
पिथौरागढ़। होली में हंसी-ठिठौली भी खूब होती है। देवर-भाभी और प्रेमी-प्रेमिका से संबंधित गीत भी खूब गाए जाते हैं। इनमें चल उठो पछैया मेघ देवर सब रंग भीजे चुनरी, तू कर ले अपनो ब्याह देवर हमरो भरोसो जन करिए, तेरे नैना रसीले यार बालम प्रीति लगा ले नैनन से, पर युवा होल्यार खूब मस्त रहते हैं।