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Pithoragarh News: विशेषज्ञ डॉक्टरों को नहीं भायी अनुबंध की डोज, अब स्थायी की दवा पर भरोसा
Sat, 19 Jul 2025 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 19 Jul 2025 10:59 PM IST
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पिथौरागढ़। मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में बॉन्डधारी फैकल्टी के रूप में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं। संचालन के ढाई साल के भीतर सात बार साक्षात्कार के बाद भी यहां सिर्फ तीन विशेषज्ञों की ही अनुबंध पर तैनाती हो सकी है। अब इस प्रक्रिया को खत्म कर स्थायी तैनाती का फैसला लिया गया है। पूर्व में हुए साक्षात्कारों में शामिल होने वाले विशेषज्ञों ने सीमांत जिले के बेस अस्पताल में तैनाती लेने से इन्कार कर दिया था। ऐसे में यहां इनकी स्थायी तैनाती करना चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर नगर के नजदीक ल्युंठूड़ा में 65 करोड़ रुपये से बेस अस्पताल खोला गया जो वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित हो रहा है। यहां प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विशेषज्ञों के 159 पद स्वीकृत हैं। संचालन के ढाई साल के भीतर अब तक विशेषज्ञों की अनुबंध पर तैनाती करने के लिए सात बार साक्षात्कार हुए हैं लेकिन परिणाम बेहतर नहीं निकला। सिर्फ तीन विशेषज्ञ ही बेस अस्पताल को मिल सके हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक, इन साक्षात्कारों में शामिल होने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ तो पहुंचे लेकिन अधिकांश ने सीमांत जिले के मेडिकल कॉलेज में तैनाती लेने से दूरी बनाई। अब चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बेस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की स्थायी नियुक्ति का फैसला लिया है। अब देखने वाली बात यह है कि बेस और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ स्थायी तैनाती लेने के इच्छुक होंगे या सीमांत के लोगों को फिर निराश होना पड़ेगा।
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अगले साल से कैसे शुरू होगी मेडिकल की पढ़ाई
चंडाक के मोस्टमानू में मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है जहां कुशल चिकित्सक तैयार करने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पिछले दिनों पिथौरागढ़ पहुंचकर अगले वर्ष से मेडिकल कॉलेज में पहला बैच शुरू करने की बात कही थी। अब तक मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल में फैकल्टी के सिर्फ तीन पदों पर ही तैनाती हो सकी है, 99 फीसदी पद रिक्त हैं। इस साल को बीतने में कुछ महीने ही शेष हैं। ऐसे में अगले वर्ष तक बगैर फैकल्टी के मेडिकल कॉलेज में पहला बैच कैसे शुरू होगा और कुशल चिकित्सक कैसे तैयार होंगे, इसे लेकर कॉलेज प्रबंधन की चिंता बढ़ने लगी है।
कोट
मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन संचालित बेस अस्पताल में अब फैकल्टी की स्थायी तैनाती होगी। अनुबंध पर सिर्फ सीनियर रेजीडेंट तैनात किए जाएंगे। उम्मीद है कि नई प्रक्रिया अपनाने से फैकल्टी मिलेगी। अगले वर्ष से मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है। - डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़
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जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर नगर के नजदीक ल्युंठूड़ा में 65 करोड़ रुपये से बेस अस्पताल खोला गया जो वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित हो रहा है। यहां प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विशेषज्ञों के 159 पद स्वीकृत हैं। संचालन के ढाई साल के भीतर अब तक विशेषज्ञों की अनुबंध पर तैनाती करने के लिए सात बार साक्षात्कार हुए हैं लेकिन परिणाम बेहतर नहीं निकला। सिर्फ तीन विशेषज्ञ ही बेस अस्पताल को मिल सके हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक, इन साक्षात्कारों में शामिल होने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ तो पहुंचे लेकिन अधिकांश ने सीमांत जिले के मेडिकल कॉलेज में तैनाती लेने से दूरी बनाई। अब चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बेस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की स्थायी नियुक्ति का फैसला लिया है। अब देखने वाली बात यह है कि बेस और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ स्थायी तैनाती लेने के इच्छुक होंगे या सीमांत के लोगों को फिर निराश होना पड़ेगा।
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अगले साल से कैसे शुरू होगी मेडिकल की पढ़ाई
चंडाक के मोस्टमानू में मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है जहां कुशल चिकित्सक तैयार करने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पिछले दिनों पिथौरागढ़ पहुंचकर अगले वर्ष से मेडिकल कॉलेज में पहला बैच शुरू करने की बात कही थी। अब तक मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल में फैकल्टी के सिर्फ तीन पदों पर ही तैनाती हो सकी है, 99 फीसदी पद रिक्त हैं। इस साल को बीतने में कुछ महीने ही शेष हैं। ऐसे में अगले वर्ष तक बगैर फैकल्टी के मेडिकल कॉलेज में पहला बैच कैसे शुरू होगा और कुशल चिकित्सक कैसे तैयार होंगे, इसे लेकर कॉलेज प्रबंधन की चिंता बढ़ने लगी है।
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मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन संचालित बेस अस्पताल में अब फैकल्टी की स्थायी तैनाती होगी। अनुबंध पर सिर्फ सीनियर रेजीडेंट तैनात किए जाएंगे। उम्मीद है कि नई प्रक्रिया अपनाने से फैकल्टी मिलेगी। अगले वर्ष से मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है। - डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़