सीएम पुत्र ने ठोकी दावेदारी
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2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस टिकटों को लेकर अब दोराहे पर खड़ी हो गई है। इस बार सवाल परिवारवाद का है। डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र से जहां सीएम हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत ने दावा ठोका है वहीं कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से उनके समधी विजय सिजवाली ने ताल ठोक दी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत और समधी ने दावेदारी कर परिवारवाद के सवाल को सिर उठाने का मौका दे दिया है। वीरेंद्र रावत और विजय सिजवाली ने दावेदारी का औपचारिक तरीका अपनाते हुए अपना आवेदन जिला कांग्रेस कमेटी के जरिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा है।
यह किसी से छिपा नहीं है कि कांग्रेस में बड़े नेताओं के बेटे भी विरासत में मिली राजनीतिक संपदा का फायदा 2017 के चुनाव में उठाने की कोशिश में हैं। ये सभी राजनीतिक रूप से सक्रिय भी हैं जिनमें वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश, राजस्व मंत्री यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य, मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत और आनंद रावत, बेटी अनुपमा रावत आदि शामिल हैं। इनकी गाड़ी अगर अटक रही है तो सिर्फ परिवारवाद के सवाल पर। कांग्रेस में टिकटों को लेकर इस बात का भी झगड़ा है कि टिकट रसूख वाले नेताओं के बेटों के खाते में जाने भी दिया जाए या नहीं। खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत को यहां तक कहना पड़ा था कि उनके परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा। कारण यह भी है कि हरीश रावत के बेटे का नाम आते ही अन्य नेता पुत्रों के टिकट का सवाल भी उठ खड़ा होता है। ऐसे में डीडीहाट से दावेदारी कर वीरेंद्र रावत ने इस ‘मधुमक्खी के छत्ते’ को छेड़ दिया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पुष्पा देउपा ने बताया कि मुख्यमंत्री के बेटे वीरेंद्र के साथ-साथ हिमांशु ओझा, मदन मोहन भट्ट, दामोदर भट्ट और कनालीछीना के ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी के आवेदन भी मिले हैं। अब यह संख्या बढ़कर 16 पहुंच गई है। वीरेंद्र रावत ने पिछले दिनों डीडीहाट क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर सक्रिय राजनीति में उतरने का संकेत भी दिया था। पूर्व में वीरेंद्र के खटीमा से चुनाव मैदान में उतरने की अधिक संभावना जताई जा रही थी। अब कांग्रेस को यह भी तय करना होगा कि नेता पुत्रों के टिकटों को लेकर वह क्या रणनीति अपनाए। कारण, युवराजों के पिता भी राजनीति में सक्रिय हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं।