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Pithoragarh News: ओम पर्वत और पंचाचूली की चोटियों से बर्फ गायब
Sat, 19 Jul 2025 10:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 19 Jul 2025 10:53 PM IST
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व्यास घाटी स्थित ओम पर्वत बर्फ पिघलने से इस तरह नजर आ रहा है। स्रोत:ग्रामीण।
धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी में 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध पंचाचूली शिखर की पांचों चोटियों के साथ ही व्यास घाटी स्थित ओम पर्वत पर बर्फ गायब होने से पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है। हिमालय में भी पर्यावरण असंतुलन का असर दिख रहा है। हालात यह हैं कि इन चोटियों में पिछले पांच सालों की अपेक्षा इस बार सबसे अधिक बर्फ पिघली है। इन चोटियों के नजदीक दारमा और व्यास घाटी के गांवों में दिन में गर्मी का अहसास हो रहा है, जो पहले नहीं होता था।
दुग्तू निवासी जीवन सिंह दुग्ताल ने बताया कि पंचाचूली की चोटियों से बर्फ गायब होने से ये काली नजर आ रही हैं। दारमा घाटी में सड़क निर्माण, पर्यटकों की संख्या में इजाफा सहित अन्य कारणों से यहां का मौसम परिवर्तित हो गया है। तापमान बढ़ने से चोटियों से बर्फ पिघल चुकी है, जो चिंताजनक है। व्यास घाटी में 15 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत में नाम मात्र बर्फ नजर आ रही है। गुंजी की पूर्व प्रधान जसमा गुंज्याल, अर्चना गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि ओम पर्वत भी काला नजर आ रहा है। मौसम में बदलाव के चलते दिन में गर्मी हो रही है और रात में ठंड काफी कम हो चुकी है। संवाद
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कैलाश पर्वत का दक्षिणी हिस्सा भी हुआ बर्फ विहीन
धारचूला। पांच साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल यात्रा पूरी कर धारचूला बेस कैंप पहुंचा तो यात्रियों ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लोबल वार्मिंग की कहानी बयां की। गुजरात की सबसे छोटी उम्र की महिला यात्री शौम्या पटेल (25) और अन्य यात्रियों ने बताया कि कैलाश पर्वत के दक्षिणी भाग से बर्फ पिघल चुकी है। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखना अचंभित भी कर रहा है और चिंता भी बढ़ा रहा है।
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कोट
पंचाचूली पर्वत श्रृंखला से बर्फ गायब होना चिंताजनक है। यह न केवल पारिस्थितिक संकट है बल्कि सांस्कृतिक विरासत के लुप्त होने का संकेत भी है। ऐसे में समय रहते सबको सचेत होने की जरूरत है। मानव दबाव बढ़ने से हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन हो गया है। कैंपिंग के दौरान यहां की विभिन्न वनस्पतियां भी विलुप्त हो रही हैं। इसे नियंत्रित करना जरूरी है। नहीं तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। - बिशन सिंह बोनाल, पूर्व आईएफएस, सदस्य, उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड।
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दुग्तू निवासी जीवन सिंह दुग्ताल ने बताया कि पंचाचूली की चोटियों से बर्फ गायब होने से ये काली नजर आ रही हैं। दारमा घाटी में सड़क निर्माण, पर्यटकों की संख्या में इजाफा सहित अन्य कारणों से यहां का मौसम परिवर्तित हो गया है। तापमान बढ़ने से चोटियों से बर्फ पिघल चुकी है, जो चिंताजनक है। व्यास घाटी में 15 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत में नाम मात्र बर्फ नजर आ रही है। गुंजी की पूर्व प्रधान जसमा गुंज्याल, अर्चना गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि ओम पर्वत भी काला नजर आ रहा है। मौसम में बदलाव के चलते दिन में गर्मी हो रही है और रात में ठंड काफी कम हो चुकी है। संवाद
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कैलाश पर्वत का दक्षिणी हिस्सा भी हुआ बर्फ विहीन
धारचूला। पांच साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल यात्रा पूरी कर धारचूला बेस कैंप पहुंचा तो यात्रियों ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लोबल वार्मिंग की कहानी बयां की। गुजरात की सबसे छोटी उम्र की महिला यात्री शौम्या पटेल (25) और अन्य यात्रियों ने बताया कि कैलाश पर्वत के दक्षिणी भाग से बर्फ पिघल चुकी है। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखना अचंभित भी कर रहा है और चिंता भी बढ़ा रहा है।
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पंचाचूली पर्वत श्रृंखला से बर्फ गायब होना चिंताजनक है। यह न केवल पारिस्थितिक संकट है बल्कि सांस्कृतिक विरासत के लुप्त होने का संकेत भी है। ऐसे में समय रहते सबको सचेत होने की जरूरत है। मानव दबाव बढ़ने से हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन हो गया है। कैंपिंग के दौरान यहां की विभिन्न वनस्पतियां भी विलुप्त हो रही हैं। इसे नियंत्रित करना जरूरी है। नहीं तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। - बिशन सिंह बोनाल, पूर्व आईएफएस, सदस्य, उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड।