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Pithoragarh News: मलबा हटाकर निकाले वाहन में फंसे सात क्षत विक्षत शव
Mon, 09 Oct 2023 10:44 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 09 Oct 2023 10:44 PM IST
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वाहन को काटकर फंसे शवों को निकालते एनडीआरएफ के जवान। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला-गुंजी मोटर मार्ग में चट्टानों के नीचे दबी कार के मलबे से सात शव मिले। मृतकों में एक नेपाली मजदूर भी है। धारचूला में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
रविवार को दिन में डेढ़ बजे गुंजी से धारचूला की ओर आ रही बोलेरो जीप मालपा और पेलसिती झरने के बीच स्थित थक्ती झरने के समीप चट्टान के नीचे दब गई थी। आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। हजारों टन मलबा देर शाम तक नहीं हटाया जा सका। अंधेरा होने के कारण रविवार को रेस्क्यू बंद कर दिया गया था। सोमवार सुबह आठ बजे से फिर से मलबा हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान चट्टानों में बुरी तरह से दबे वाहन का मलबा मिला। वाहन के भीतर सात यात्रियों के क्षत विक्षत शव फंसे हुए थे। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे शवों को कटर और अन्य औजारों से की मदद से निकाला गया।
शवों की पहचान नपलच्यू निवासी विदन सिंह की पुत्री कोकिला 13 वर्ष, कशिश 10 वर्ष, पुत्र नितिन पांच वर्ष, बुंदी निवासी तुला राम (62 ) पुत्र संजीत राम, आशा देवी (55 ) पत्नी तुला राम, बलुवाकोट निवासी जीप चालक किशन सिंह भाट (34 ) पुत्र तारा सिंह और नेपाल के दलेख गांव निवासी भवन सिंह विकर (42 ) पुत्र राणा विकर के रूप में हुई। पुलिस सभी शवों को धारचूला लाई। यहां पर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
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..........इनसेट..........
एक साथ तीन बच्चों के शव देखकर फफक पड़े लोग
धारचूला। हादसे में अपने तीन बच्चों को खोने वाले विदन सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से धारचूला के खोतिला पहुंचाया। चट्टानों के नीचे दबी कार से जब अन्य शवों के साथ तीन बच्चों के शव निकालकर धारचूला पहुंचाए गए तो लोगों की आंखें छलक पड़ी। बच्चों के माता-पिता सहित सभी परिजन फफक पड़े। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया। उधर, हादसे में जान गंवाने वाले शिक्षक दंपति तुला राम बुदियाल और आशा देवी के परिजन भी सदमे में हैं। हादसे में मृतक चालक बलुवाकोट निवासी किशन सिंह भाट की पत्नी और बच्चों सहित अन्य परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। सांसद अजय टम्टा ने बलुवाकोट पहुंचकर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया। सभी मृतकों के घरों में दिन भर सांत्वना देने वालों की भीड़ लगी रही। संवाद
........इनसेट..........
वीदन सिंह पर दूसरी बार टूटी आपदा
धारचूला। धारचूला-गुंजी मोटर मार्ग में हुए हादसे में अपने तीन बच्चों को खोने वाले वीदन सिंह पर दूसरी बार आपदा टूटी है। नपलच्यू गांव निवासी वीदन सिंह खेतीबाड़ी का काम करते हैं। इसके अलावा उनकी गांव में ही छोटी सी दुकान है। इससे पहले वर्ष 2009 में उनकी पहली पत्नी की कुटी यांग्ती नदी से रेत निकालने के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई थी। पहली पत्नी से उनकी दो पुत्रियां स्नेहा 19 वर्ष और शीना 17 वर्ष हैं। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया। दूसरी पत्नी से दो बेटियां कोकिला 13 वर्ष, कशिश 10 वर्ष, पुत्र नितिन पांच वर्ष हुए। वह हंसी खुशी अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन काल ने उनके तीन बच्चों को लीलकर वीदन सिंह की हंसी खुशी छीन ली। इस हादसे से वीदन सिंह और उनकी पत्नी बदहवाश हैं।
......इनसेट.........
23 घंटे बाद सुचारु हो सका यातायात
धारचूला। एडीएम डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने बताया कि सोमवार सुबह आठ बजे से रेस्क्यू कार्य दोपहर एक बजे तक चला। मलबे में दबे सात शव निकाल लिए हैं। सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया है। रेस्क्यू कार्य में सेना, आईटीबीपी, 11 वीं वाहिनी एसएसबी डीडीहाट, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ,पुलिस, राजस्व टीम, गर्ग एंड गर्ग कंपनी सहित स्थानीय लोगों ने सहयोग दिया। रेस्क्यू कार्य में 11वाहिनी एसएसबी के इंचार्ज इंस्पेक्टर भरत लाल और 13 जवान शामिल थे।
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रविवार को दिन में डेढ़ बजे गुंजी से धारचूला की ओर आ रही बोलेरो जीप मालपा और पेलसिती झरने के बीच स्थित थक्ती झरने के समीप चट्टान के नीचे दब गई थी। आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। हजारों टन मलबा देर शाम तक नहीं हटाया जा सका। अंधेरा होने के कारण रविवार को रेस्क्यू बंद कर दिया गया था। सोमवार सुबह आठ बजे से फिर से मलबा हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान चट्टानों में बुरी तरह से दबे वाहन का मलबा मिला। वाहन के भीतर सात यात्रियों के क्षत विक्षत शव फंसे हुए थे। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे शवों को कटर और अन्य औजारों से की मदद से निकाला गया।
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शवों की पहचान नपलच्यू निवासी विदन सिंह की पुत्री कोकिला 13 वर्ष, कशिश 10 वर्ष, पुत्र नितिन पांच वर्ष, बुंदी निवासी तुला राम (62 ) पुत्र संजीत राम, आशा देवी (55 ) पत्नी तुला राम, बलुवाकोट निवासी जीप चालक किशन सिंह भाट (34 ) पुत्र तारा सिंह और नेपाल के दलेख गांव निवासी भवन सिंह विकर (42 ) पुत्र राणा विकर के रूप में हुई। पुलिस सभी शवों को धारचूला लाई। यहां पर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
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एक साथ तीन बच्चों के शव देखकर फफक पड़े लोग
धारचूला। हादसे में अपने तीन बच्चों को खोने वाले विदन सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से धारचूला के खोतिला पहुंचाया। चट्टानों के नीचे दबी कार से जब अन्य शवों के साथ तीन बच्चों के शव निकालकर धारचूला पहुंचाए गए तो लोगों की आंखें छलक पड़ी। बच्चों के माता-पिता सहित सभी परिजन फफक पड़े। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया। उधर, हादसे में जान गंवाने वाले शिक्षक दंपति तुला राम बुदियाल और आशा देवी के परिजन भी सदमे में हैं। हादसे में मृतक चालक बलुवाकोट निवासी किशन सिंह भाट की पत्नी और बच्चों सहित अन्य परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। सांसद अजय टम्टा ने बलुवाकोट पहुंचकर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया। सभी मृतकों के घरों में दिन भर सांत्वना देने वालों की भीड़ लगी रही। संवाद
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वीदन सिंह पर दूसरी बार टूटी आपदा
धारचूला। धारचूला-गुंजी मोटर मार्ग में हुए हादसे में अपने तीन बच्चों को खोने वाले वीदन सिंह पर दूसरी बार आपदा टूटी है। नपलच्यू गांव निवासी वीदन सिंह खेतीबाड़ी का काम करते हैं। इसके अलावा उनकी गांव में ही छोटी सी दुकान है। इससे पहले वर्ष 2009 में उनकी पहली पत्नी की कुटी यांग्ती नदी से रेत निकालने के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई थी। पहली पत्नी से उनकी दो पुत्रियां स्नेहा 19 वर्ष और शीना 17 वर्ष हैं। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया। दूसरी पत्नी से दो बेटियां कोकिला 13 वर्ष, कशिश 10 वर्ष, पुत्र नितिन पांच वर्ष हुए। वह हंसी खुशी अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन काल ने उनके तीन बच्चों को लीलकर वीदन सिंह की हंसी खुशी छीन ली। इस हादसे से वीदन सिंह और उनकी पत्नी बदहवाश हैं।
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23 घंटे बाद सुचारु हो सका यातायात
धारचूला। एडीएम डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने बताया कि सोमवार सुबह आठ बजे से रेस्क्यू कार्य दोपहर एक बजे तक चला। मलबे में दबे सात शव निकाल लिए हैं। सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया है। रेस्क्यू कार्य में सेना, आईटीबीपी, 11 वीं वाहिनी एसएसबी डीडीहाट, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ,पुलिस, राजस्व टीम, गर्ग एंड गर्ग कंपनी सहित स्थानीय लोगों ने सहयोग दिया। रेस्क्यू कार्य में 11वाहिनी एसएसबी के इंचार्ज इंस्पेक्टर भरत लाल और 13 जवान शामिल थे।
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