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Pithoragarh News: सात सौ साल पहले मिट्टी से बने पाइपों से घरों तक आता था पानी
Tue, 12 Aug 2025 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 12 Aug 2025 11:14 PM IST
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पिथौरागढ़ के संग्रहालय में रखे गए मिट्टी के पाइप सहित अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक महत्व की वस्
पिथौरागढ़। मध्यकाल में भी पहाड़ के गांवों में पाइपलाइन से पानी आता था लेकिन आज की तरह तब पाइपलाइन लोहे या फिर प्लास्टिक की नहीं बल्कि मिट्टी की होती थी। ऐसे ही मिट्टी के कुछ छोटे-छोटे पाइप पिथौरागढ़ संग्रहालय में रखे गए हैं।
गंगोलीहाट के दुगई आगर गांव में आज से लगभग दो दशक पूर्व खेतों की खोदाई के दौरान मिट्टी के तीन पाइप मिले थे। इन पाइपों को ग्रामीण जगदीश चंद्र जोशी ने पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था। साल 2009 में भारत आए जर्मनी के प्रमुख पुरातत्वविद ने मिट्टी से बने इन पाइपों को 15वीं सदी के आसपास का बताया था। संग्रहालय में रखे गए एक पाइप की लंबाई लगभग दो फुट है।
कुछ गांवों में आज से छह-सात सौ साल पहले गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए इसी तरह के मिट्टी के पाइपों का उपयोग किया जाता था। इन पाइपों से केवल ग्रेविटी में ही पानी की आपूर्ति होती थी। दुगई आगर के अलावा चंपावत जिले के चौमेल गांव में भी इस तरह के मिट्टी के पाइप मिले थे। पुरातत्वविदों के अनुसार मिट्टी के इन पाइपों से मध्यकाल में पहाड़ की सभ्यता का पता चलता है। सदियों पुराने मिट्टी के यह पाइप इतिहास विषय के शोधार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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पिथौरागढ़ में मौजूद हैं वृहत्पाषाण कालीन अवशेष
पिथौरागढ़ में हाल ही में एक गुफा खोजी गई है जिसमें पाषाण कालीन भित्ति चित्र उकेरे गए हैं। इससे पूर्व जिले के सिलौली गांव में खोदाई के दौरान प्राचीन मृदभांड भी मिल चुके हैं। चंपावत जिले में उत्तर मध्यकाल में निर्मित धातु के जनजातीय आभूषण भी मिले थे। इन सभी पुरातात्विक अवशेषों को संग्रहालय में सहेजा गया है। पुरातत्वविदों के अनुसार इस तरह के अवशेष संबंधित युग में मानव की प्रथा, सामाजिक संरचना, कलात्मक क्षमता और संस्कृति के बारे में बताते हैं।
कोट
जिले के गंगोलीहाट के दुगई आगर गांव में खोदाई के दौरान मिले पाइप संग्रहालय में रखे गए हैं। यह पाइप उत्तर मध्यकाल के हैं। इसके अलावा खोदाई के दौरान मिले अन्य वस्तुओं के अवशेष भी संग्रहालय में रखे गए हैं। यदि कहीं भी लोगों के पास इस तरह के पुरातात्विक महत्व की कोई वस्तुएं हों तो उन्हें संग्रहालय को दे सकते हैं। - डॉ.चंद्र सिंह चौहान, पुरातत्व प्रभारी, अल्मोड़ा
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गंगोलीहाट के दुगई आगर गांव में आज से लगभग दो दशक पूर्व खेतों की खोदाई के दौरान मिट्टी के तीन पाइप मिले थे। इन पाइपों को ग्रामीण जगदीश चंद्र जोशी ने पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था। साल 2009 में भारत आए जर्मनी के प्रमुख पुरातत्वविद ने मिट्टी से बने इन पाइपों को 15वीं सदी के आसपास का बताया था। संग्रहालय में रखे गए एक पाइप की लंबाई लगभग दो फुट है।
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कुछ गांवों में आज से छह-सात सौ साल पहले गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए इसी तरह के मिट्टी के पाइपों का उपयोग किया जाता था। इन पाइपों से केवल ग्रेविटी में ही पानी की आपूर्ति होती थी। दुगई आगर के अलावा चंपावत जिले के चौमेल गांव में भी इस तरह के मिट्टी के पाइप मिले थे। पुरातत्वविदों के अनुसार मिट्टी के इन पाइपों से मध्यकाल में पहाड़ की सभ्यता का पता चलता है। सदियों पुराने मिट्टी के यह पाइप इतिहास विषय के शोधार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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पिथौरागढ़ में मौजूद हैं वृहत्पाषाण कालीन अवशेष
पिथौरागढ़ में हाल ही में एक गुफा खोजी गई है जिसमें पाषाण कालीन भित्ति चित्र उकेरे गए हैं। इससे पूर्व जिले के सिलौली गांव में खोदाई के दौरान प्राचीन मृदभांड भी मिल चुके हैं। चंपावत जिले में उत्तर मध्यकाल में निर्मित धातु के जनजातीय आभूषण भी मिले थे। इन सभी पुरातात्विक अवशेषों को संग्रहालय में सहेजा गया है। पुरातत्वविदों के अनुसार इस तरह के अवशेष संबंधित युग में मानव की प्रथा, सामाजिक संरचना, कलात्मक क्षमता और संस्कृति के बारे में बताते हैं।
कोट
जिले के गंगोलीहाट के दुगई आगर गांव में खोदाई के दौरान मिले पाइप संग्रहालय में रखे गए हैं। यह पाइप उत्तर मध्यकाल के हैं। इसके अलावा खोदाई के दौरान मिले अन्य वस्तुओं के अवशेष भी संग्रहालय में रखे गए हैं। यदि कहीं भी लोगों के पास इस तरह के पुरातात्विक महत्व की कोई वस्तुएं हों तो उन्हें संग्रहालय को दे सकते हैं। - डॉ.चंद्र सिंह चौहान, पुरातत्व प्रभारी, अल्मोड़ा