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दो साल से नहीं खुले चमडुंगरी स्कूल के ताले
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कनालीछीना का प्राथमिक विद्यालय चमडुंगरी।
- फोटो : PITHORAGARH
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। कनालीछीना ब्लॉक के चमडुंगरी प्राथमिक स्कूल की घंटी पिछले दो साल से नहीं बजी है। दो साल पूर्व तक बच्चों से गुलजार रहने वाला विद्यालय गांव से हुए पलायन के कारण वीरान पड़ा है।
चमडुंगरी प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन के लिए दो साल पूर्व 10 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। भवन का निर्माण भी हुआ लेकिन गांव में कोई भी बच्चा नहीं रहा। गांव से करीब 30 से अधिक परिवारों ने कनालीछीना और पिथौरागढ़ पलायन कर लिया। इससे विद्यालय में ताला लग गया।
यहां तैनात एकमात्र शिक्षक को भी कर्णधार विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। तब से विद्यालय के आसपास लावारिस जानवर घूम रहे हैं। देखरेख के अभाव में यहां झाड़ियां उग आई हैं। अब कई लोग वापस गांव आना चाहते हैं और अपने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने के लिए तैयार हैं। लोगों ने शिक्षा विभाग से विद्यालय को दोबारा संचालित करने की मांग की है।
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बाहर गए परिवार अब महंगाई के कारण वापस आना चाहते हैं। वो अपने बच्चों का प्रवेश प्राथमिक विद्यालय में कराने के लिए तैयार हैं। बस अब शिक्षा विभाग को पहल करनी है। अगर विद्यालय फिर से खुलता है तो गांव में रिवर्स पलायन बढ़ जाएगा।
- उर्मिला चंदेल, प्रधान, चमडुंगरी।
आंगनबाड़ी के 10 बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वो सहायिका के घर जाकर पढ़ रहे हैं। ऐसे में जब तक कक्षाओं का संचालन नहीं होता है तो तब तक के लिए आंगनबाड़ी के बच्चों की व्यवस्था इस स्कूल में की जानी चाहिए।
- उमेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता।
गांव में जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक की जाएगी। लोगों को बच्चों को बाहर से लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रवेश के लिए बच्चे आने के बाद कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।
- हरक कोहली, बीईओ, कनालीछीना।
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चमडुंगरी प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन के लिए दो साल पूर्व 10 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। भवन का निर्माण भी हुआ लेकिन गांव में कोई भी बच्चा नहीं रहा। गांव से करीब 30 से अधिक परिवारों ने कनालीछीना और पिथौरागढ़ पलायन कर लिया। इससे विद्यालय में ताला लग गया।
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यहां तैनात एकमात्र शिक्षक को भी कर्णधार विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। तब से विद्यालय के आसपास लावारिस जानवर घूम रहे हैं। देखरेख के अभाव में यहां झाड़ियां उग आई हैं। अब कई लोग वापस गांव आना चाहते हैं और अपने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने के लिए तैयार हैं। लोगों ने शिक्षा विभाग से विद्यालय को दोबारा संचालित करने की मांग की है।
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बाहर गए परिवार अब महंगाई के कारण वापस आना चाहते हैं। वो अपने बच्चों का प्रवेश प्राथमिक विद्यालय में कराने के लिए तैयार हैं। बस अब शिक्षा विभाग को पहल करनी है। अगर विद्यालय फिर से खुलता है तो गांव में रिवर्स पलायन बढ़ जाएगा।
- उर्मिला चंदेल, प्रधान, चमडुंगरी।
आंगनबाड़ी के 10 बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वो सहायिका के घर जाकर पढ़ रहे हैं। ऐसे में जब तक कक्षाओं का संचालन नहीं होता है तो तब तक के लिए आंगनबाड़ी के बच्चों की व्यवस्था इस स्कूल में की जानी चाहिए।
- उमेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता।
गांव में जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक की जाएगी। लोगों को बच्चों को बाहर से लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रवेश के लिए बच्चे आने के बाद कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।
- हरक कोहली, बीईओ, कनालीछीना।