फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Ropaii in Thal

ओ हिमा लस्का कमर स्यार खेतन मा पुत हालि दे...

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:46 PM IST
विज्ञापन
Ropaii in Thal
थल (पिथौरागढ़)। पहाड़ में जहां एक ओर पलायन और जंगली जानवरों के आतंक के कारण अधिकतर लोग खेती छोड़ चुके हैं वहीं कई लोग अभी भी खेती कर परिवार पाल रहे हैं। थल में परंपरागत तरीके से गीत गाकर धान की रोपाई की जा रही है। इन दिनों घाटी वाले क्षेत्रों में रोपाई वाले खेतों से ओ हिमा लस्का कमर स्यार खेतन मा पुत हालि दे... आदि कर्णप्रिय गीत सुनाई देे रहे हैं।
विज्ञापन

डुंगरी गांव के गंगा सिंह मेहता भी 20 साल से अपनी 40 नाली जमीन में रोपाई विधि से धान की खेती कर रहे हैं। गंगा का कहना है कि जमीन मां के समान हैं, उसे बंजर छोड़ना पाप जैसा है। वह हर साल प्राचीन कश्मीरिया प्रजाति किस्म का ही धान लगा रहे हैं। इस धान का बीज खेतों के साथ ही उन्हें दादा-परदादा से धरोहर में मिला।
विज्ञापन

इस कारण जुलाई में हर साल धान की रोपाई के लिए डुंगरी गांव में उत्सव का माहौल रहता है। बृहस्पतिवार को जब गांव की महिलाओं ने सहकारिता की भावना से खेत में धान के पौधे रोपे। सुबह से शुरू हुई रोपाई शाम छह बजे खत्म हुई। महिलाओं ने छपेली, न्यौली, चेतीआदि कुमाऊंनी गीत गाकर रोपाई की।
विज्ञापन
विज्ञापन

महिलाओं ने खेत की मालकिन को संबोधन कर कहा - ओ हिमा लस्का कमर हाव मा ऊछ्याली बेर स्यार खेतन पुत हालि दे...। महिलाओं ने को धूरा हुनेल मासी क फूल.., पारी भिड़ा बुरसी फूली गे, कमला की बोजी पकै दे रोटी गाड़ी नैहे गे छ पीपलकोटी आदि लोकगीत गाते हुए रोपाई पूरी करवाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed