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Pithoragarh News: जरूरी काम से आने-जाने वाले के लिए ही खोल रहे मार्ग
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घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क में मलबा हटाती पोकलैंड मशीन। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन सीमा को जोड़ने वाले लिपुलेख एनएच पर मलबा आने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। हालांकि बीआरओ जरूरी काम से धारचूला से व्यास घाटी और घाटी से तहसील मुख्यालय आने वालों के लिए समय-समय पर मार्ग खोल रहा है।
सीमा सड़क संगठन ने लिपुलेख एनएच पर एक से 14 दिसंबर तक चौड़ीकरण कार्य के लिए यातायात बंद किया था। हालांकि इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी शुरू होने से घाटी की तरफ जाने वालों की संख्या बेहद कम है। दूसरी तरफ घाटी से आने वाले लोगों की संख्या भी नहीं के बराबर है। इस कारण सड़क कटिंग के बाद मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार बीआरओ चौड़ीकरण के कार्य के साथ ही सड़क पर आए मलबे को हटाने में लगा है लेकिन मलबा लगातार गिरने से यातायात बाधित हो रहा है। नजंग और गर्बाधार के बीच पूरी तरह सड़क से मलबा हटाने में मुश्किल आ रही है। वर्तमान में व्यास घाटी में बूंदी, गर्ब्यांग, गुंजी, नाभी, रोंगकांग, नपलच्यू में 200 से अधिक लोग निवास कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग सड़क निर्माण कार्य में लगे हैं।
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कुछ परिवार अपनी दुकानों और अन्य कार्यों के लिए वहां रुके हैं। इसके अलावा सीमा पर तैनात सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों की आवाजाही भी वर्ष भर बनी रहती हैं।
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सीमा सड़क संगठन ने लिपुलेख एनएच पर एक से 14 दिसंबर तक चौड़ीकरण कार्य के लिए यातायात बंद किया था। हालांकि इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी शुरू होने से घाटी की तरफ जाने वालों की संख्या बेहद कम है। दूसरी तरफ घाटी से आने वाले लोगों की संख्या भी नहीं के बराबर है। इस कारण सड़क कटिंग के बाद मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार बीआरओ चौड़ीकरण के कार्य के साथ ही सड़क पर आए मलबे को हटाने में लगा है लेकिन मलबा लगातार गिरने से यातायात बाधित हो रहा है। नजंग और गर्बाधार के बीच पूरी तरह सड़क से मलबा हटाने में मुश्किल आ रही है। वर्तमान में व्यास घाटी में बूंदी, गर्ब्यांग, गुंजी, नाभी, रोंगकांग, नपलच्यू में 200 से अधिक लोग निवास कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग सड़क निर्माण कार्य में लगे हैं।
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कुछ परिवार अपनी दुकानों और अन्य कार्यों के लिए वहां रुके हैं। इसके अलावा सीमा पर तैनात सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों की आवाजाही भी वर्ष भर बनी रहती हैं।