रक्षाबंधन 2020 : सीमाओं पर तैनात जवानों की कलाइयों पर इस बार सजेंगी ऐंपण वाली राखियां
बच्चों की बनाई 15 हजार से अधिक राखियां सीमाओं पर तैनात जवानों को भेजी जाएंगी। इस बार राखियों में पहाड़ की संस्कृति और कला ऐंपण आकर्षण का केंद्र होंगे। घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के बच्चों ने राखियां बनानी शुरू कर दी हैं।
सोसायटी के बच्चे पिछले पांच साल से राखियां बना रहे हैं। इस साल भी संस्था की ओर से धान, रिंगाल, जूट के धागे और चीड़ के स्यूंते से राखियां बनाई जा रही हैं।
इसके अलावा रक्षा धागे ओर रुद्राक्ष से बनी राखी भी बनाई जा रही हैं, जो खासी आकर्षक हैं। संस्था के अध्यक्ष अजय ओली ने बताया इस साल राखियों में ऐंपण का प्रयोग भी किया है।
दिव्या रस्तोगी ऐंपण को रक्षा धागे में पिरोना और पूजा भट्ट पेपर आर्ट के साथ ही मोतियों की बनी राखियों को बनाना सिखा रही हैं।
पीएम मोदी, सीडीएस रावत और अमिताभ कर चुके प्रशंसा
हर साल की तरह इस साल भी सेना के जवानों को राखियां भेजी जाएंगी। उन्होंने बताया बच्चे 15 हजार से अधिक जवानों के लिए राखियां भजेंगे।
उन्होंने बताया कि अर्निंग विद लर्निंग का यह कांसेप्ट बच्चों में कौशल विकास और हुनर को बढ़ाता है। उन्होंने बच्चों के हाथों की बनी राखियों को खरीदकर निर्धन और बेसहारा बच्चों का मनोबल बढ़ाने का अनुरोध भी लोगों से किया है।
घनश्याम ओली सोसायटी के बच्चे पिछले पांच सालों से अपने हाथों से राखियां बनाकर सेना के जवानों को भेज रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीडीएस जनरल विपिन रावत और वॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी बच्चों के हाथों की बनी राखियों की प्रशंसा कर चुके हैं।