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खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति का संकल्प

Sat, 03 Sep 2016 10:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Sat, 03 Sep 2016 10:12 PM IST
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Resolution of freedom from open defecation
एजीएम के समापन पर गीत पेश करतीं जनजाति महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

नेपाल के छांगरू में आयोजित रं कल्याण संस्था की वार्षिक आम सभा (एजीएम) में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि खुले में शौच की प्रथा को पूरी तरह बंद किया जाएगा और शादी-विवाह जैसे समारोहों में किए जाने वाले अपव्यय पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। विवाह कार्यक्रमों को बेहद सादगी से करने का फैसला लिया गया।

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समापन कार्यक्रम से पहले रं समाज में असाधारण कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया, इसमें 150 वर्ष पहले उत्तराखंड एवं मित्रराष्ट्र नेपाल में कई धर्मशालाओं का निर्माण करने वाली दानवीर महिला जसूली बूढ़ी शौक्याणी तथा स्वतंत्रता सेनानी परमल सिंह ह्यांकी को मरणोपरांत रं रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। रं लिपि तैयार करने वाले नंदराम लाला, दिल्ली, लखनऊ आदि बड़े महानगरों के ऐतिहासिक स्थानों पर मूर्तियां स्थापित करने वाले मूर्तिकार डीआर सीपाल, नेपाल सेना के सेनाध्यक्ष जनरल गोपाल बोरा, भारत में कई स्कूलों का निर्माण करने वाली छाना तिंकरी और दानवीर मोतिमा तिंकरी को रं गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्कृति एवं साहित्य में असाधारण सेवा देने केे लिए गीतकार डम्स्या देवी गर्ब्याल, धनसिंह कुटियाल (दोनों मरणोपरांत), रणजीत सिंह कुटियाल को साहित्य एवं संस्कृति रत्न से सम्मानित किया गया।
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रं कल्याण संस्था के एजीएम में अंतिम दिन कार्यसमिति की आम बैठक में नई केंद्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया, इसमें महिमन ह्यांकी एवं सुंदर बोनाल को चुनाव अधिकारी बनाया गया। पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष गढ़वाल कमिश्नर चंद्र सिंह नपलच्याल ने अपने कार्यकाल में हुए कार्यों की जानकारी दी। बाद में आम राय से वन विभाग के उच्चपद से सेवानिवृत्त महिमन सिंह गर्ब्याल को केंद्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया। ग्येलबो बोरा और शांति नबियाल को उपाध्यक्ष बनाया गया। करण सिंह ग्वाल को महासचिव एवं देवेंद्र गर्ब्याल को कार्यालय सचिव, प्रतिभा नपलच्याल को सांस्कृतिक सचिव, डीएस पतियाल को कोषाध्यक्ष, मोहन सिंह को संप्रेक्षक बनाया गया। रिंगलेबा, अमटीकर पत्रिका के लिए डा. रवि पतियाल को मुख्य संपादक बनाया गया। इसके अलावा 11 सदस्यों की स्थायी समिति का भी गठन किया गया।

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