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Pithoragarh News: वर्ष 1871 में रजवार पुष्कर सिंह पाल ने शुरू किया था जौलजीबी मेला
Mon, 13 Nov 2023 11:23 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 13 Nov 2023 11:23 PM IST
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जौलजीबी मेला संस्थापक पुष्कर सिंह पाल (फाइल फोटो)।
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कुंवर बहादुर पाल
अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट रियासत के तत्कालीन रजवार पुष्कर सिंह पाल ने वर्ष 1871 में पड़ोसी देश नेपाल और तिब्बत से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक रिश्तों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूतीबगड़ के काली-गोरी नदी के संगम तट पर ज्वालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना कर जौलजीबी मेले की शुरूआत कराई। इस मेले का शुभारंभ मार्गशीर्ष संक्रांति के दिन होता है।
वर्ष 1970 के दशक तक मेला क्षेत्र जोग्यूड़ा, बगड़ीहाट, तीतरी तक के विशाल भू-भाग पर आयोजित होता था। नेपाल से आवागमन के लिए राज दरबार की ओर से काली-गोरी नदी पर लकड़ी के पुल लगाए जाते थे। रजवार पुष्कर सिंह पाल के बाद गजेंद्र पाल, विक्रम पाल और टिकेंद्र पाल ने मेले की व्यवस्थाएं संभाली।
वर्ष 1975 में मेला राज्य सरकार ने अपने अधीन कर 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर शुरू कराया। इससे पूर्व मेला हमेशा मार्गशीर्ष संक्रांति को ज्वालेश्वर महादेव में जलाभिषेक के बाद शुरू होता था। डेढ़ से दो माह तक चलने वाले मेले में तिब्बत, नेपाल के अलावा, अल्मोड़ा, बरेली, टनकपुर, लोहाघाट, चंपावत, मथुरा आदि शहरों के व्यापारी आते थे। अल्मोड़ा के हरलाल शाह की बाल मिठाई मशहूर होती थी।
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तिब्बत से नमक, शुहागा, चंवर गाय की पूंछ, ऊनी वस्त्र, मांस, नेपाल से घी, शहद, शराब, काष्ठ शिल्प और मैदानी क्षेत्रों के व्यापारी लोहे, तांबे, पीतल के बर्तन, खिलौने आदि सामान लेकर आते थे। दुकानों से कर के रूप में एक आने से लेकर चार आने तक की वसूली कर राज खजाने में जमा की जाती थी। मवेशियों की बिक्री जोग्यूड़ा, बगड़ीहाट और तीतरी में होती थी।
88 वर्षीय राजेंद्र सिंह पाल बताते हैं कि वह अपने पिता के साथ मेला देखने जाते थे। एक शेर नमक के बदले चार शेर अनाज दिया जाता था। उस समय अनाज के बदले सामान मिल जाता था। जोग्यूड़ा की मूंगफली प्रसिद्ध थी। रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।
भारत के दारमा, व्यास घाटी के व्यापारी जड़ी, बूटियां, आलू राजमा, ऊन और सूखा मांस बेचते थे। राजा टेंट और प्रकाश की व्यवस्था करते थे। सुरक्षा के लिए राजा की सेना मुस्तैद रहती थी। 90 वर्षीय पुरुषोत्तम उपाध्याय, वासुदेव जोशी उस दौर के मेले को याद कर भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं कि तिब्बत और नेपाल के लोगों से काफी अच्छे रिश्ते थे। वहां के लोग मेले के बाद भी रिश्ते निभाने घरों में आते-जाते रहते थे। संवाद
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भोटिया खेड़ा में लगती थी राजा की अस्थायी कचहरी
अस्कोट। राजस्व अभिलेखों में मेलास्थल आज तक दूतीबगड़ ही दर्ज है। राजा विक्रम सिंह पाल के समय खानसामा रहे 95 वर्षीय प्रेम सिंह रावत बताते हैं कि राजा की अस्थायी कचहरी भोटिया खेड़ा में लगती थी। इसमें आपराधिक और जमीन संबंधी मामले निपटाए जाते थे। लोग मेले से सालभर के लिए जरूरत का सामान ले जाते थे। मेले में रिश्ते-नातेदारों से भेंट होती थी। संवाद
मुख्यमंत्री धामी आज करेंगे जौलजीबी मेले का उद्घाटन
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार दोपहर 2:30 बजे ऐतिहासिक जौलजीबी मेले का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री के वरिष्ठ निजी सचिव भूपेंद्र सिंह बसेड़ा ने बताया कि सीएम गौचर मेले का उद्घाटन करने के बाद दोपहर 1:15 बजे नैनीसैनी हवाई पट्टी पहुंचेंगे। यहां से वह 1:50 बजे एसएसबी कैंप जोग्यूड़ा हेलीपैड पहुंचेंगे। सीएम मेला स्थल का निरीक्षण कर प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। 3:50 बजे वह जौलजीबी से प्रस्थान कर 4:30 बजे खटीमा पहुंचेंगे। संवाद
जौलजीबी मेले में छात्र-छात्राओं को राफ्टिंग कराएगा निगम
पिथौरागढ़। जौलजीबी मेले में मंगलवार से उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के सहयोग से केएमवीएन रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। निगम के प्रबंधक साहसिक पर्यटन दिनेश गुरुरानी ने बताया कि क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को गोरी और काली नदी में राफ्टिंग प्रशिक्षण के साथ ही हिमालय बचाओ अभियान के तहत स्वच्छता कार्यक्रम और पौधरोपण से भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि निगम की ओर से वर्ष 2005 से लगातार जौलजीबी मेले में राफ्टिंग कराई जा रही है। अब तक क्षेत्र के विद्यालयों के 2000 से अधिक छात्र-छात्राओं को निशुल्क राफ्टिंग कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग करने के इच्छुक प्रतिभागी अपने विद्यालयों से संपर्क करें। संवाद
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट रियासत के तत्कालीन रजवार पुष्कर सिंह पाल ने वर्ष 1871 में पड़ोसी देश नेपाल और तिब्बत से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक रिश्तों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूतीबगड़ के काली-गोरी नदी के संगम तट पर ज्वालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना कर जौलजीबी मेले की शुरूआत कराई। इस मेले का शुभारंभ मार्गशीर्ष संक्रांति के दिन होता है।
वर्ष 1970 के दशक तक मेला क्षेत्र जोग्यूड़ा, बगड़ीहाट, तीतरी तक के विशाल भू-भाग पर आयोजित होता था। नेपाल से आवागमन के लिए राज दरबार की ओर से काली-गोरी नदी पर लकड़ी के पुल लगाए जाते थे। रजवार पुष्कर सिंह पाल के बाद गजेंद्र पाल, विक्रम पाल और टिकेंद्र पाल ने मेले की व्यवस्थाएं संभाली।
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वर्ष 1975 में मेला राज्य सरकार ने अपने अधीन कर 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर शुरू कराया। इससे पूर्व मेला हमेशा मार्गशीर्ष संक्रांति को ज्वालेश्वर महादेव में जलाभिषेक के बाद शुरू होता था। डेढ़ से दो माह तक चलने वाले मेले में तिब्बत, नेपाल के अलावा, अल्मोड़ा, बरेली, टनकपुर, लोहाघाट, चंपावत, मथुरा आदि शहरों के व्यापारी आते थे। अल्मोड़ा के हरलाल शाह की बाल मिठाई मशहूर होती थी।
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तिब्बत से नमक, शुहागा, चंवर गाय की पूंछ, ऊनी वस्त्र, मांस, नेपाल से घी, शहद, शराब, काष्ठ शिल्प और मैदानी क्षेत्रों के व्यापारी लोहे, तांबे, पीतल के बर्तन, खिलौने आदि सामान लेकर आते थे। दुकानों से कर के रूप में एक आने से लेकर चार आने तक की वसूली कर राज खजाने में जमा की जाती थी। मवेशियों की बिक्री जोग्यूड़ा, बगड़ीहाट और तीतरी में होती थी।
88 वर्षीय राजेंद्र सिंह पाल बताते हैं कि वह अपने पिता के साथ मेला देखने जाते थे। एक शेर नमक के बदले चार शेर अनाज दिया जाता था। उस समय अनाज के बदले सामान मिल जाता था। जोग्यूड़ा की मूंगफली प्रसिद्ध थी। रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।
भारत के दारमा, व्यास घाटी के व्यापारी जड़ी, बूटियां, आलू राजमा, ऊन और सूखा मांस बेचते थे। राजा टेंट और प्रकाश की व्यवस्था करते थे। सुरक्षा के लिए राजा की सेना मुस्तैद रहती थी। 90 वर्षीय पुरुषोत्तम उपाध्याय, वासुदेव जोशी उस दौर के मेले को याद कर भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं कि तिब्बत और नेपाल के लोगों से काफी अच्छे रिश्ते थे। वहां के लोग मेले के बाद भी रिश्ते निभाने घरों में आते-जाते रहते थे। संवाद
भोटिया खेड़ा में लगती थी राजा की अस्थायी कचहरी
अस्कोट। राजस्व अभिलेखों में मेलास्थल आज तक दूतीबगड़ ही दर्ज है। राजा विक्रम सिंह पाल के समय खानसामा रहे 95 वर्षीय प्रेम सिंह रावत बताते हैं कि राजा की अस्थायी कचहरी भोटिया खेड़ा में लगती थी। इसमें आपराधिक और जमीन संबंधी मामले निपटाए जाते थे। लोग मेले से सालभर के लिए जरूरत का सामान ले जाते थे। मेले में रिश्ते-नातेदारों से भेंट होती थी। संवाद
मुख्यमंत्री धामी आज करेंगे जौलजीबी मेले का उद्घाटन
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार दोपहर 2:30 बजे ऐतिहासिक जौलजीबी मेले का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री के वरिष्ठ निजी सचिव भूपेंद्र सिंह बसेड़ा ने बताया कि सीएम गौचर मेले का उद्घाटन करने के बाद दोपहर 1:15 बजे नैनीसैनी हवाई पट्टी पहुंचेंगे। यहां से वह 1:50 बजे एसएसबी कैंप जोग्यूड़ा हेलीपैड पहुंचेंगे। सीएम मेला स्थल का निरीक्षण कर प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। 3:50 बजे वह जौलजीबी से प्रस्थान कर 4:30 बजे खटीमा पहुंचेंगे। संवाद
जौलजीबी मेले में छात्र-छात्राओं को राफ्टिंग कराएगा निगम
पिथौरागढ़। जौलजीबी मेले में मंगलवार से उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के सहयोग से केएमवीएन रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। निगम के प्रबंधक साहसिक पर्यटन दिनेश गुरुरानी ने बताया कि क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को गोरी और काली नदी में राफ्टिंग प्रशिक्षण के साथ ही हिमालय बचाओ अभियान के तहत स्वच्छता कार्यक्रम और पौधरोपण से भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि निगम की ओर से वर्ष 2005 से लगातार जौलजीबी मेले में राफ्टिंग कराई जा रही है। अब तक क्षेत्र के विद्यालयों के 2000 से अधिक छात्र-छात्राओं को निशुल्क राफ्टिंग कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग करने के इच्छुक प्रतिभागी अपने विद्यालयों से संपर्क करें। संवाद