{"_id":"61d87f0916e3fd124b49d112","slug":"posting-of-military-in-indo-china-border-pithoragarh-news-hld4502878123","type":"story","status":"publish","title_hn":"न डिगे देश की शान, -20 डिग्री की ठंड में भी डटे जवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न डिगे देश की शान, -20 डिग्री की ठंड में भी डटे जवान
विज्ञापन
चीन सीमा से सटी चौकियों में इस तरह तैनात रहते हैं भारतीय सेना के जवान।
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। जरा सा पारा गिरने पर भी हम ठिठुरने लगते हैं और कामकाज छोड़ रजाई-कंबल में घुस जाते हैं। जरा सोचिए जब तीन से चार डिग्री सेल्सियस में हमारा यह हाल होता है तो शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस कम तापमान में क्या स्थिति होती होगी। जी हां... भारतीय जवान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस में देश की सीमा की रक्षा में मुस्तैद हैं। हाड़ कंपाने और शरीर को गला देने वाली ठंड के बावजूद जवान रात-दिन डटे रहते हैं ताकि लोग चैन की नींद सो सकें।
चीन और नेपाल के साथ सीमा विवाद के बाद सीमा पर हालात सामान्य नहीं हैं। आए दिन सीमा पर विवाद की बातें आम हो गई हैं। इसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं। भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान 10 हजार से 16 हजार फुट तक की ऊंचाई पर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में ड्यूटी दे रहे हैं।
अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों के लिए खाद्य और अन्य सामग्री हेलिकॉप्टर के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। बेहद कम तापमान के मौसम और चारों ओर बर्फ से न सिर्फ पर्यावरण की दुश्वारियां सैनिकों की जान ले सकती है बल्कि बर्फीले पहाड़ों पर पड़ने वाली धूप की चमक से फौजियों को आंख की रोशनी जाने का डर भी रहता है। ऐसे हालातों में भी जवान अपनी जान की परवाह किए बगैर अग्रिम चौकियों पर डटे हैं।
विज्ञापन
बर्फ पिघलाकर पानी रहे हैं जवान
पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात जवानों को सर्दी के मौसम में सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भारी बर्फबारी के बाद जवान बर्फ को पिघलाकर पानी पी रहे हैं। जवानों के लिए भेजे गए जूस भी जम गए हैं।
भारत-चीन सीमा पर न्यूनतम तापमान (सब माइनस में हैं)
गर्ब्यांग : -04
गुंजी : -10
मिलम : -10
बुगडियार : -10
कालापानी : -12
नाभीढांग : -15
कुटी : -15
दावे : -20
दुंग : -20
लिपुपास : -25
तापमान शून्य से नीचे होने पर पानी भी जम जाता है। कपड़े भी बर्फ की तरह अकड़ जाते हैं। एएससी सप्लाई कोर हेलिकाप्टर और अन्य माध्यमों से अग्रिम चौकियों में सामान पहुंचाता है। जिन स्थानों पर ज्यादा बर्फ होती है, वहां पैकेट गिराए जाते हैं। जवानों को ड्यूटी के दौरान सफाई का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसलिए उन्हें डिस्पोजेबल अंडर गार्मेंट्स उपलब्ध कराए जाते हैं। -ले. सुषमा बिष्ट माथुर, सेवानिवृत्त अधिकारी।
हमारे जवान विषम परिस्थितियों में माइनस 20 से माइनस 40 डिग्री तापमान के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बनी चौकियों पर डटे रहते हैं। इन हालात में ड्यूटी करना आसान नहीं है। ट्रेनिंग के दौरान जवानों को भीषण सर्दी और प्रचंड गर्मी में रहने के गुर सिखाए जाते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जवानों लिए भेजा गया जूस भी कई बार जम जाता है। कारगिल युद्ध के बाद सरकारों ने जवानों की सुविधाएं बढ़ा दी हैं। -सत्यपाल सिंह गुलेरिया, ले. कर्नल सेवानिवृत्त।
विज्ञापन
चीन और नेपाल के साथ सीमा विवाद के बाद सीमा पर हालात सामान्य नहीं हैं। आए दिन सीमा पर विवाद की बातें आम हो गई हैं। इसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं। भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान 10 हजार से 16 हजार फुट तक की ऊंचाई पर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में ड्यूटी दे रहे हैं।
विज्ञापन
अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों के लिए खाद्य और अन्य सामग्री हेलिकॉप्टर के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। बेहद कम तापमान के मौसम और चारों ओर बर्फ से न सिर्फ पर्यावरण की दुश्वारियां सैनिकों की जान ले सकती है बल्कि बर्फीले पहाड़ों पर पड़ने वाली धूप की चमक से फौजियों को आंख की रोशनी जाने का डर भी रहता है। ऐसे हालातों में भी जवान अपनी जान की परवाह किए बगैर अग्रिम चौकियों पर डटे हैं।
विज्ञापन
बर्फ पिघलाकर पानी रहे हैं जवान
पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात जवानों को सर्दी के मौसम में सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भारी बर्फबारी के बाद जवान बर्फ को पिघलाकर पानी पी रहे हैं। जवानों के लिए भेजे गए जूस भी जम गए हैं।
भारत-चीन सीमा पर न्यूनतम तापमान (सब माइनस में हैं)
गर्ब्यांग : -04
गुंजी : -10
मिलम : -10
बुगडियार : -10
कालापानी : -12
नाभीढांग : -15
कुटी : -15
दावे : -20
दुंग : -20
लिपुपास : -25
तापमान शून्य से नीचे होने पर पानी भी जम जाता है। कपड़े भी बर्फ की तरह अकड़ जाते हैं। एएससी सप्लाई कोर हेलिकाप्टर और अन्य माध्यमों से अग्रिम चौकियों में सामान पहुंचाता है। जिन स्थानों पर ज्यादा बर्फ होती है, वहां पैकेट गिराए जाते हैं। जवानों को ड्यूटी के दौरान सफाई का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसलिए उन्हें डिस्पोजेबल अंडर गार्मेंट्स उपलब्ध कराए जाते हैं। -ले. सुषमा बिष्ट माथुर, सेवानिवृत्त अधिकारी।
हमारे जवान विषम परिस्थितियों में माइनस 20 से माइनस 40 डिग्री तापमान के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बनी चौकियों पर डटे रहते हैं। इन हालात में ड्यूटी करना आसान नहीं है। ट्रेनिंग के दौरान जवानों को भीषण सर्दी और प्रचंड गर्मी में रहने के गुर सिखाए जाते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जवानों लिए भेजा गया जूस भी कई बार जम जाता है। कारगिल युद्ध के बाद सरकारों ने जवानों की सुविधाएं बढ़ा दी हैं। -सत्यपाल सिंह गुलेरिया, ले. कर्नल सेवानिवृत्त।