Dharchula News: तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से आठ घंटे फंसी रहीं पोलिंग पार्टियां, दस सड़कें बंद
चीन सीमा के साथ ही व्यास घाटी के सात गांवों को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से पोलिंग पार्टियां और मतदाता करीब आठ घंटे तक फंसे रहे। ऐसे में मतदान पार्टियां पैदल सफर कर पोलिंग बूथों तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
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पंचायत चुनाव के बीच बारिश ने मतदाताओं, निर्वाचन कर्मियों के साथ ही आम लोगों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। बारिश के बाद मलबा आने से सड़कें बंद हो रही हैं इससे निर्वाचन कर्मियों का बूथों तक तो मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। चीन सीमा के साथ ही व्यास घाटी के सात गांवों को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से पोलिंग पार्टियां और मतदाता करीब आठ घंटे तक फंसे रहे। अन्य नौ सड़कों पर भी लंबे समय से रफ्तार थमी है। ऐसे में मतदान पार्टियां पैदल सफर कर पोलिंग बूथों तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
पंचायत चुनाव में मतदान करने के लिए जिला, विकासखंड मुख्यालय सहित अन्य हिस्सों से मतदाता अपने गांवों की तरफ रवाना हो रहे हैं। उन्हें भी सड़क के बंद होने से जाम में फंसना पड़ा। बीआरओ ने शाम पांच बजे के करीब बोल्डर हटाकर आवाजाही शुरू कराई, तब जाकर मतदान कर्मी और मतदाता गंतव्य के लिए रवाना हो सके। इधर, मिलम-बुई, बांसबगड़-कोटा, डीडीहाट-आदिचौरा-हुनेरा, तवाघाट-उमचिया, नाचनी-भैंसकोट, खुमती-कटौजिया, होकरा-नामिक, बगीचा-सिलियाखोला, तवोवन-रांथी सड़कें भी लंबे समय से बंद हैं।
सड़क बंद होने से ग्रामीण पैदल पहुंचे बूंदी
इस बार व्यास घाटी के सातों गांवों में मतदान केंद्र बनाया गया है। इन गांवों के अधिकांश मतदाता विकासखंड मुख्यालय में निवास करते हैं। सिर्फ गांवों में ही मतदान केंद्र बनने से ग्रामीण और मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों में पहुंचना मजबूरी है। चुनाव नजदीक आते ही मतदाता अपने गांवों का रुख करने लगे हैं। बीते सोमवार को तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से 50 से अधिक ग्रामीणों को पैदल सफर कर अपने गांव बूंदी पहुंचना पड़ा।