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बलतड़ी में आठ दिन से नहीं आए फार्मासिस्ट
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झूलाघाट क्षेत्र के स्वास्थ्य उपकेंद्र बलतड़ी में फार्मासिस्ट का इंतजार करते मरीज। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र बलतड़ी में फार्मासिस्ट आठ दिन से नदारद हैं। इस कारण लोगों को इलाज कराने के लिए दूरदराज भटकना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को अस्पताल पहुंचे ग्रामीणों को भी मायूसी हाथ लगी।
ग्रामीणों ने बताया कि फार्मासिस्ट उपकेंद्र में मुश्किल से मिलते हैं। बुधवार को वह उपकेंद्र में आए थे, इसके बाद उनकी कोई सुध नहीं है। न ही उपकेंद्र में कोई अन्य कर्मी मौजूद रहता है। कई बार छोटी सी बीमारी के लिए भी जिला मुख्यालय या झूलाघाट पीएचसी जाना पड़ता है। ग्रामीण उपकेंद्र आते हैं लेकिन फार्मासिस्ट का इंतजार और धूप सेंकने के बाद वापस घर चले जाते हैं। कई ग्रामीण तो सीधे जिला मुख्यालय या पीएचसी झूलाघाट चले जाते हैं।
उपकेंद्र बलतड़ी खोला तो सुविधा देने के लिए है, लेकिन इसमें फार्मासिस्ट नहीं होने से लोगों को दिक्कत हो रही है। फार्मासिस्ट उपकेंद्र में नियमित नहीं आते हैं। उन्हें ग्रामीणों के दर्द से कोई लेना देना नहीं है।
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गोपाल सिंह धारियाल, भूतपूर्व सैनिक।
उपकेंद्र बलतड़ी में फार्मासिस्ट रोज आते तो अच्छा रहता। कम से कम बुखार, जुखाम आदि की दवा तो मिल जाती, लेकिन फार्मासिस्ट तो आते ही नहीं है। ऐसे में इस उपकेंद्र को बंद कर देना चाहिए।
ललित मोहन भट्ट, व्यापारी।
फार्मासिस्ट के उपकेंद्र में नहीं होने की जानकारी पूर्व में भी आई थी, जिसके चलते उनका वेतन रोका गया था। अगर फिर से वह उपकेंद्र में ड्यूटी नहीं दे रहे हैं तो उनका वेतन रोका जाएगा।
-डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।
मेरा क्षेत्र बहुत बड़ा है। कैंप करने के लिए दूसरे गांव गया हूं। सड़क बंद होने की वजह से बलतड़ी नहीं जा पा रहा हूं। -श्रीश पांडे, फार्मासिस्ट, उपकेंद्र बलतड़ी स्वास्थ्य केंद्र।
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ग्रामीणों ने बताया कि फार्मासिस्ट उपकेंद्र में मुश्किल से मिलते हैं। बुधवार को वह उपकेंद्र में आए थे, इसके बाद उनकी कोई सुध नहीं है। न ही उपकेंद्र में कोई अन्य कर्मी मौजूद रहता है। कई बार छोटी सी बीमारी के लिए भी जिला मुख्यालय या झूलाघाट पीएचसी जाना पड़ता है। ग्रामीण उपकेंद्र आते हैं लेकिन फार्मासिस्ट का इंतजार और धूप सेंकने के बाद वापस घर चले जाते हैं। कई ग्रामीण तो सीधे जिला मुख्यालय या पीएचसी झूलाघाट चले जाते हैं।
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उपकेंद्र बलतड़ी खोला तो सुविधा देने के लिए है, लेकिन इसमें फार्मासिस्ट नहीं होने से लोगों को दिक्कत हो रही है। फार्मासिस्ट उपकेंद्र में नियमित नहीं आते हैं। उन्हें ग्रामीणों के दर्द से कोई लेना देना नहीं है।
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गोपाल सिंह धारियाल, भूतपूर्व सैनिक।
उपकेंद्र बलतड़ी में फार्मासिस्ट रोज आते तो अच्छा रहता। कम से कम बुखार, जुखाम आदि की दवा तो मिल जाती, लेकिन फार्मासिस्ट तो आते ही नहीं है। ऐसे में इस उपकेंद्र को बंद कर देना चाहिए।
ललित मोहन भट्ट, व्यापारी।
फार्मासिस्ट के उपकेंद्र में नहीं होने की जानकारी पूर्व में भी आई थी, जिसके चलते उनका वेतन रोका गया था। अगर फिर से वह उपकेंद्र में ड्यूटी नहीं दे रहे हैं तो उनका वेतन रोका जाएगा।
-डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।
मेरा क्षेत्र बहुत बड़ा है। कैंप करने के लिए दूसरे गांव गया हूं। सड़क बंद होने की वजह से बलतड़ी नहीं जा पा रहा हूं। -श्रीश पांडे, फार्मासिस्ट, उपकेंद्र बलतड़ी स्वास्थ्य केंद्र।