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गोल्फा के लोग ट्रॉली के सहारे कर रहे आवाजाही
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मदकोट के गोल्फा गांव के लोग ट्रॉली के सहारे घरों तक पहुंचा रहे राशन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
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मदकोट (पिथौरागढ़)। मदकोट के गोल्फा गांव के लोगों का जीवन मोती घाट और फर्फकोट में गाड़ पर बनी ट्राली के सहारे चल रहा है। क्षेत्र के लोग हर साल आपदा की मार झेलते रहते हैं। पुल बह जाने के बाद ट्राली ही गांव के लोगों का सहारा बनी हुई है।
वर्ष 2013 में आई आपदा में स्थानीय गाड़ पर बना पुल तिनके की तरह बह गया था। इसके बाद यहां अस्थायी पुल बनाया गया था। जो आपदाओं में लगातार बहता रहा। चार माह पूर्व भी अस्थायी पुल उफानाई गाड़ में बह गया। इसके बाद से ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ गई है। ग्रामीणों को गांव तक राशन पहुंचाने के लिए ट्राली का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव की 500 की आबादी पुल बह जाने के कारण मुश्किलों में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। गांव तक आने जाने में ग्रामीणों को चार घंटे का समय लग रहा है।
आलू, राजमा बाजार तक पहुंचाना मुश्किल
मदकोट। क्षेत्र में आलू और राजमा बहुतायत में होता है। सड़क और पुल नहीं होने से लोगों ने इन उत्पादाें को बाजार मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों ने शासन-प्रशासन से शीघ्र पुल निर्माण की बात कही है। संवाद
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क्षेत्र के लोग लगातार आपदा की मार झेलते रहते हैं। पुल ध्वस्त होने के बाद ट्राली ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। शासन-प्रशासन को जल्द पुल निर्माण की कार्यवाही करनी चाहिए। - लक्ष्मण सिंह, प्रधान
आलू निकालने का समय हो गया है। राजमा भी तैयार है। अब पुल नहीं होने के कारण राजमा और आलू को बाजार ले जाना लोगों के लिए मुश्किल है। - भुप्पी बथियाल, स्थानीय
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वर्ष 2013 में आई आपदा में स्थानीय गाड़ पर बना पुल तिनके की तरह बह गया था। इसके बाद यहां अस्थायी पुल बनाया गया था। जो आपदाओं में लगातार बहता रहा। चार माह पूर्व भी अस्थायी पुल उफानाई गाड़ में बह गया। इसके बाद से ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ गई है। ग्रामीणों को गांव तक राशन पहुंचाने के लिए ट्राली का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव की 500 की आबादी पुल बह जाने के कारण मुश्किलों में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। गांव तक आने जाने में ग्रामीणों को चार घंटे का समय लग रहा है।
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आलू, राजमा बाजार तक पहुंचाना मुश्किल
मदकोट। क्षेत्र में आलू और राजमा बहुतायत में होता है। सड़क और पुल नहीं होने से लोगों ने इन उत्पादाें को बाजार मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों ने शासन-प्रशासन से शीघ्र पुल निर्माण की बात कही है। संवाद
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क्षेत्र के लोग लगातार आपदा की मार झेलते रहते हैं। पुल ध्वस्त होने के बाद ट्राली ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। शासन-प्रशासन को जल्द पुल निर्माण की कार्यवाही करनी चाहिए। - लक्ष्मण सिंह, प्रधान
आलू निकालने का समय हो गया है। राजमा भी तैयार है। अब पुल नहीं होने के कारण राजमा और आलू को बाजार ले जाना लोगों के लिए मुश्किल है। - भुप्पी बथियाल, स्थानीय