फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Pithoragarh News: Panic of leopard forced to live life in closed door

Pithoragarh: दर्जनों गांव में तेंदुए की दहशत, बंद दरवाजे में जीवन जीने को मजबूर हुए ग्रामीण

Fri, 16 Jun 2023 06:13 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)
संवाद न्यूज एजेंसी, गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) Updated Fri, 16 Jun 2023 06:13 PM IST
सार

जाखनी उप्रेती, भामा, गानुरा, पाभै के ग्रामीण सुबह देर से घरों के दरवाजे खोल रहे हैं। रात को उजाले में ही दरवाजे बंद कर देते हैं।

विज्ञापन
Pithoragarh News: Panic of leopard forced to live life in closed door
तेंदुआ - फोटो : Social Media

विस्तार

वन विभाग की ओर से दो तेंदुए पकड़ने के बाद तीसरे की क्षेत्र में चहलकदमी से दर्जनों गांव के लोग बंद दरवाजों में जीवन जी रहे हैं। तीसरे तेंदुए के दिखने के बाद ग्रामीणों का भय कई गुना बढ़ गया है।

विज्ञापन


जाखनी उप्रेती, भामा, गानुरा, पाभै के ग्रामीण सुबह देर से घरों के दरवाजे खोल रहे हैं। रात को उजाले में ही दरवाजे बंद कर देते हैं। बच्चों का स्कूल पिछले माह से बंद है। महिलाएं मवेशियों के चारे के लिए जंगल नहीं जा रही हैं। ग्रामीण अपना काम धाम छोड़कर दिन में झुंड बनाकर जंगल की झाड़ियां काट रहे हैं। डर इतना है कि हल्की भी आहट ग्रामीणों को डरा देतीे है। हालांकि वन विभाग ने अभी भी गांव में पिंजरा लगा रखा है और टीम गश्त कर रही है।
विज्ञापन


जलागम से गरीब परिवारों के लिए बकरी पालन के लिए 25 हजार की सहायता लेने के लिए लाभार्थी नहीं मिल रहे। पिछले माह तेंदुओं ने दो बच्चों पर हमला किया था। जिसमें उपचार के दौरान एक की मौत हो गई। दो तेंदुए पिंजरे में कैद होने के बाद तेंदुए की दहशत कम नहीं हुई है। तीसरे तेंदुए की दस्तक से डर और अधिक बढ़ गई है। लोगों का जीवन दरवाजों के पीछे कैद होकर रह गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हल्की से आहट भी दिन में ही डरा देती है। तेंदुए के डर से जीवन खतरों भरा हो गया है।
- राधा देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष।

ग्रामीणों की पूरी दिनचर्या प्रभावित हो गई है। तेंदुए के खौफ से लोग अपनी मवेशियों को कम दाम में बेचने को मजबूर हैं।
- दीप देवी, स्थानीय।

हर समय तेंदुए का डर बना रहता है। शासन प्रशासन को ग्रामीणों की व्यथा देखते हुए तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारने की अनुमति देनी चाहिए।
- नरेंद्र सिंह, स्थानीय।

तेंदुए ने दो बच्चों पर हमला किया, जिसमें एक की उपचार के दौरान मौत हो गई। तब से पूरा क्षेत्र डरा हुआ है। सरकार को इस तरह की घटनाओं का हल निकालना चाहिए।

- केदार सिंह, स्थानीय।

हम तेंदुए के व्यवहार को समझ नहीं पा रहे है। तेंदुआ मानव जीवन को समझ चुका है। वह अब आसान शिकार के लिए आबादी का रुख कर रहा है। जंगल में उसे शिकार के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शिकार ढूंढने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन आबादी वाले क्षेत्र के समीप रहकर वह कभी भी पालतू जानवरों का आसानी से शिकार कर सकता है।
- मनोज मटवाल, वन्य जीव विशेषज्ञ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed