फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Outrage as no review petition is filed in the Ladli murder case in the Supreme Court in pithoragarh

लाडली हत्याकांड प्रकरण : सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने से परिजनों में आक्रोश

Tue, 06 Jan 2026 05:29 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 06 Jan 2026 05:29 PM IST
सार

पिथौरागढ़ में लाडली मामले में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के चार महीने बाद भी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने से लोगों में फिर आक्रोश बढ़ गया है। 

विज्ञापन
Outrage as no review petition is filed in the Ladli murder case in the Supreme Court in  pithoragarh
पिथौरागढ़ में लाडली मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल होने से लोगों में आक्रोश। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिथौरागढ़ में लाडली के मामले में आश्वासन के चार महीने बाद भी पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने से फिर से लोगों में आक्रोश है। लाडली के परिजनों और अन्य लोगों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि सरकार लाडली को न्याय दिलाने के लिए गंभीर नहीं है। जल्द पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने पर सभी ने फिर से आंदोलन का ऐलान किया है।

विज्ञापन

मंगलवार को पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी ने पत्रकारों से वार्ता की। कहा कि सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिल सका। कमजोर पैरवी से लाडली के साथ जघन्य अपराध करने वाले दोषी बरी हो गए। सरकार लाडली और उसके परिजनों को न्याय दिलाने में नाकाम रही। जब पूरे प्रदेश में जनआंदोलन शुरू हुआ तो सरकार ने लाडली के परिजनों को सर्वोच्च न्यायालय में जल्द ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का आश्वासन दिया। चार महीने बाद भी याचिका दाखिल नहीं हुई है जो सरकार की गंभीर लापरवाही है। साफ है कि सरकार बेटियों और महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि अब लाडली के परिजनों के साथ ही हर बेटी, मां का हौसला जवाब देने लगा है। जल्द ही पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं हुई तो फिर से सीमांत जिले में बड़ा जनआंदोलन होगा, इसकी गूंज पूरे प्रदेश में होगी।

विज्ञापन

सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिल सका। कमजोर पैरवी से लाडली के साथ जघन्य अपराध करने वाले दोषी बरी हो गए। सरकार लाडली और उसके परिजनों को न्याय दिलाने में नाकाम रही। - महेंद्र लुंठी, पूर्व दायत्विधारी

विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिला। हमें इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने की जानकारी तक नहीं दी गई। सरकार की इस नाकामी के चलते दोषी बरी हो गए और लाडली को न्याय से वंचित होना पड़ा। सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के झूठे आश्वासन हमें दिए हैं। अब तक याचिका दाखिल नहीं हुई है। ऐसे में हमें न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरना होगा। जनता इसमें हमारा साथ देगी हमें पूरा विश्वास है। - तारा चंद, लाडली के ताऊ

 

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed