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गांवों को नगर पालिका में शामिल करने का विरोध शुरू
अमर उजाला ब्यूराे पिथौरागढ़।
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:28 PM IST
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नगरपालिका में मिलाए जाने को लेकर प्रदर्शन करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर पालिका सीमा विस्तार को लेकर सुनवाई से पहले ही गांवों में इसका विरोध शुरू हो गया है। पिथौरागढ़ से सटी इन छह ग्राम सभाओं के प्रधान और तमाम ग्रामीण पालिका में शामिल नहीं होना चाहते है। ग्रामीणों ने परिसीमन के लिए की जा रही कवायद का विरोध किया। गांवों को नगर पालिका में शामिल करने पर इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।
सोमवार को प्रभावित गांव नेड़ा, धनौड़ा गांवों के लेाग मुख्यालय पहुंच गए। उन्होंने परिसीमन के लिए की जा रही कवायद का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने फायदे के लिए गांवों की पंचायती व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश कर रही है। नगर निकाय में मिलाने से गांव के सामाजिक और आर्थिक तानाबाना टूट जाएगा। गांवों के संसाधनों का बेतरतीबी से दोहन होगा। ग्रामीणों पर करों की मार अलग से पड़ेगी। उन्होंने सरकार पर गांवों को नगर पालिका में मिलाने का एकतरफा फैसला थोपने आरोप लगाया। चेताया कि सरकार ने परिसीमन का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। इस दौरान नेड़ा ग्राम प्रधान उषा शर्मा, धनौड़ा की बबीता चंद, बस्ते के मोहन शर्मा, क्षेत्र पंचायत सदस्य ईश्वर चंद्र, अशोक चंद, हरीश शर्मा, सुनील शर्मा, मनोज साही आदि थे।
सभासद और नगरवासियों ने भी किया विरोध
निकाय के सभासद और क्षेत्रवासी भी गांवों को पालिका में मिलाने के फैसले के खिलाफ उतर गए हैं। शनिवार को सभासद सुबोध बिष्ट के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर परिसीमन पर विरोध जताया है। इस मौके पर सभासद और क्षेत्रवासियों ने कहा कि प्रस्तावित गांव नगर में मिलाने का शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं। ग्रामीणों की भावनाओं को देखते हुए यथा स्थिति बनी रहनी चाहिए। इससे ग्रामीणों के हित सुरक्षित रहेंगे और सरकार को विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देने का एलान भी किया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रावत, मदन मोहन जोशी आदि थे।
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ग्राम सभा बस्ते में विरोध प्रस्ताव पास
विकास खंड विण की बस्ते ग्राम सभा में निकाय में मिलाने जाने के विरोध में प्रस्ताव पास हो गया है। सोमवार को बुलाई गई ग्रामसभा की बैठक में एकजुट प्रधान और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। बैठक में गांव की नागरिक व्यवस्थाओं और नगर निकाय में मिलाने के दुष्परिणामों पर चर्चा हुई। तय किया गया कि गांव को नगर निकाय में शामिल करने की कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण आंदोलन चलाने से भी गुरेज नहीं करेंगे। ग्राम सभा ने प्रस्ताव पास कर सरकार के परिसीमन के फैसले को वापन नहीं लिए जाने पर अदालत में वाद दायर करने की चेतावनी भी दी है।
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सोमवार को प्रभावित गांव नेड़ा, धनौड़ा गांवों के लेाग मुख्यालय पहुंच गए। उन्होंने परिसीमन के लिए की जा रही कवायद का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने फायदे के लिए गांवों की पंचायती व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश कर रही है। नगर निकाय में मिलाने से गांव के सामाजिक और आर्थिक तानाबाना टूट जाएगा। गांवों के संसाधनों का बेतरतीबी से दोहन होगा। ग्रामीणों पर करों की मार अलग से पड़ेगी। उन्होंने सरकार पर गांवों को नगर पालिका में मिलाने का एकतरफा फैसला थोपने आरोप लगाया। चेताया कि सरकार ने परिसीमन का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। इस दौरान नेड़ा ग्राम प्रधान उषा शर्मा, धनौड़ा की बबीता चंद, बस्ते के मोहन शर्मा, क्षेत्र पंचायत सदस्य ईश्वर चंद्र, अशोक चंद, हरीश शर्मा, सुनील शर्मा, मनोज साही आदि थे।
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सभासद और नगरवासियों ने भी किया विरोध
निकाय के सभासद और क्षेत्रवासी भी गांवों को पालिका में मिलाने के फैसले के खिलाफ उतर गए हैं। शनिवार को सभासद सुबोध बिष्ट के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर परिसीमन पर विरोध जताया है। इस मौके पर सभासद और क्षेत्रवासियों ने कहा कि प्रस्तावित गांव नगर में मिलाने का शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं। ग्रामीणों की भावनाओं को देखते हुए यथा स्थिति बनी रहनी चाहिए। इससे ग्रामीणों के हित सुरक्षित रहेंगे और सरकार को विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देने का एलान भी किया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रावत, मदन मोहन जोशी आदि थे।
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ग्राम सभा बस्ते में विरोध प्रस्ताव पास
विकास खंड विण की बस्ते ग्राम सभा में निकाय में मिलाने जाने के विरोध में प्रस्ताव पास हो गया है। सोमवार को बुलाई गई ग्रामसभा की बैठक में एकजुट प्रधान और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। बैठक में गांव की नागरिक व्यवस्थाओं और नगर निकाय में मिलाने के दुष्परिणामों पर चर्चा हुई। तय किया गया कि गांव को नगर निकाय में शामिल करने की कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण आंदोलन चलाने से भी गुरेज नहीं करेंगे। ग्राम सभा ने प्रस्ताव पास कर सरकार के परिसीमन के फैसले को वापन नहीं लिए जाने पर अदालत में वाद दायर करने की चेतावनी भी दी है।