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Pithoragarh News: इलाज के लिए लगानी पड़ती है 100 किमी की दौड़
Fri, 05 Jul 2024 11:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 05 Jul 2024 11:40 PM IST
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पिथौरागढ़। बंगापानी क्षेत्र के दो दर्जनों से अधिक गांव के लोगों के पास इलाज की बेहतर सुविधा नहीं है। क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए 100 किमी दूर पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है।
सीमांत क्षेत्र बंगापानी के करीब 30 से अधिक गांव के लोगों के पास इलाजर के लिए अस्पताल की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बंगापानी बाजार से दो किलोमीटर दूर मवानी दवानी में आयुर्वेदिक अस्पताल है। इसके अलावा 16 किमी दूर बरम, 30 किलोमीटर दूर जौलजीबी और 15 किलोमीटर दूर मदकोट में भी आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इन आयुर्वेदिक अस्पतालों पर मवानी दवानी, बंगापानी, माणी धामी, धामी गांव, मदरमा, सेलमाली, दाखिम, आलम दारमा, सेरा शिलिंग, सिरतोला, गोल्फा, टांगा, बोना, जाराजिबली, देवलेख, कनार बरम, मेतली और लुमती समेत 30 गांवों की 10 हजार से अधिक की आबादी निर्भर है।
क्षेत्र में एक भी एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। विभिन्न बीमारियों में जांच और उपचार के लिए लोगों को दो हजार रुपये खर्च कर जिला अस्पताल पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है।
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कोट
आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोगों के लिए अब तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। जांच और उपचार के लिए पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। इस कारण क्षेत्र से कई लोग पलायन कर चुके हैं। - तनुजा देवी, ग्राम प्रधान सिरतोला।
कोट
बंगापानी क्षेत्र में करीब 30 से अधिक गांव हैं। इनकी आबादी 10 हजार से अधिक हैं। क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल खोला जाना चाहिए। - संजीव बिष्ट, ग्राम प्रधान जारा जिबली
कोट
आकस्मिक घटना होने पर इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव से मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक लाते हैं। क्षेत्र में बंगापानी में एलोपैथिक अस्पताल खोले जाने की जरूरत है। - उमेश धामी, ग्राम प्रधान मदरमा
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सीमांत क्षेत्र बंगापानी के करीब 30 से अधिक गांव के लोगों के पास इलाजर के लिए अस्पताल की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बंगापानी बाजार से दो किलोमीटर दूर मवानी दवानी में आयुर्वेदिक अस्पताल है। इसके अलावा 16 किमी दूर बरम, 30 किलोमीटर दूर जौलजीबी और 15 किलोमीटर दूर मदकोट में भी आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इन आयुर्वेदिक अस्पतालों पर मवानी दवानी, बंगापानी, माणी धामी, धामी गांव, मदरमा, सेलमाली, दाखिम, आलम दारमा, सेरा शिलिंग, सिरतोला, गोल्फा, टांगा, बोना, जाराजिबली, देवलेख, कनार बरम, मेतली और लुमती समेत 30 गांवों की 10 हजार से अधिक की आबादी निर्भर है।
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क्षेत्र में एक भी एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। विभिन्न बीमारियों में जांच और उपचार के लिए लोगों को दो हजार रुपये खर्च कर जिला अस्पताल पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है।
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आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोगों के लिए अब तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। जांच और उपचार के लिए पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। इस कारण क्षेत्र से कई लोग पलायन कर चुके हैं। - तनुजा देवी, ग्राम प्रधान सिरतोला।
कोट
बंगापानी क्षेत्र में करीब 30 से अधिक गांव हैं। इनकी आबादी 10 हजार से अधिक हैं। क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल खोला जाना चाहिए। - संजीव बिष्ट, ग्राम प्रधान जारा जिबली
कोट
आकस्मिक घटना होने पर इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव से मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक लाते हैं। क्षेत्र में बंगापानी में एलोपैथिक अस्पताल खोले जाने की जरूरत है। - उमेश धामी, ग्राम प्रधान मदरमा