फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Not yet a single family left Satlang

अब तक एक भी परिवार ने नहीं छोड़ा सत्यालगांव

Sun, 19 Nov 2017 10:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Sun, 19 Nov 2017 10:09 PM IST
विज्ञापन
Not yet a single family left Satlang
चहल पहल से भरा सत्यालगांव - फोटो : अमर उजाला

सत्यालगांव पर पलायन का ग्रहण नहीं लगा है। इस गांव को अब तक एक भी परिवार ने नहीं छोड़ा है। सुखद बात यह है कि पिछले 20 वर्ष में गांव में परिवारों की संख्या 60 से बढ़कर 85 हो गई है। गांव में सुविधाओं को देखते हुए नापड़, डाणा, बल्याऊ, मालाझूला, तुरगोली, जजौली के कई परिवारों ने यहां मकान बना लिए। सत्यालगांव से थल का राजकीय इंटर कॉलेज करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है। दो किलोमीटर के दायरे में कई सरकारी और निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। तीन किलोमीटर दूर गोचर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। गांव की सीमा तक सड़क पहुंची है। पेयजल का कोई संकट नहीं है। सब्जी और अनाज का अच्छा उत्पादन हो जाता है।

विज्ञापन


इस गांव की एक खासियत यह है कि यहां पर सामाजिक एकता देखने को मिलती है। हर किसी के सुख-दुख में गांव के सभी लोग शामिल होते हैं। अन्य गांवों से आकर इस गांव में बसे लोगों को कोई बेगानापन नहीं लगता। उत्सव और त्योहारों को यह लोग उत्साह से मनाते हैं। इसी अच्छे माहौल को देखते हुए 35 परिवार यहां किराए का मकान लेकर भी रहने लगे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सुख, सुविधा वाली जगह पर जाकर बसने वालों को वह सामाजिक माहौल नहीं मिल सकता जो अपने गांव में मिलता है। गांव के लोग यह भी कहते हैं कि यदि थल को विकासखंड मुख्यालय बनाया जाए तो आसपास के गांवों का विकास तेज होने लगेगा और पलायन से मुक्ति मिल जाएगी।
विज्ञापन


पलायन के प्रति सोच बदलने की जरूरत
सत्यालगांव के उपप्रधान सुनील सत्याल का कहना है कि पलायन के लिए लोगों की खुद की सोच भी जिम्मेदार होती है। अपने संसाधनों का उपयोग करना, अपने समाज के बीच रहना ही सबसे सुकून भरा होता है। पलायन की पीड़ा से बचने के लिए लोगों को सोच बदलनी होगी। अपने हकों और अधिकारों को हासिल करने के लिए लोगों को सरकार पर दबाव बनाना होगा। फिर गांव कैसे समृद्ध नहीं होते।
विज्ञापन
विज्ञापन


पहाड़ छोड़कर जाने की कदापि न सोचें
सत्यालगांव में जमीन खरीदकर मकान बनाने वाले अनिल कार्की का कहना है कि सत्यालगांव में सभी सुविधाएं हैं। जीवनयापन, शिक्षा, चिकित्सा की सुविधा मिल जाए तो फिर कोई भी अन्यत्र जाने की नहीं सोचता। कम से कम पहाड़ के गांवों को इसी तरह से समृद्ध बनाया जा सकता है। वह कहते हैं कि लोगों को पहाड़ छोड़कर जाने की कदापि नहीं सोचनी चाहिए। अपने गांव को खुशहाल बनाया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed