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आपदा में भी नेपाली संचार सेवा का था सहारा

Sun, 27 Nov 2016 10:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़) Updated Sun, 27 Nov 2016 10:48 PM IST
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Nepali communications services in support of disaster was
आपदा में भी नेपाली संचार सेवा का था सहारा - फोटो : अमर उजाला
पिछले तीन साल से यानी 2013 से सीमांत क्षेत्र में नेपाली सिम बिना किसी बाधा के चल रहे हैं। आपदा राहत कार्य हो या किसी वीवीआईपी की मूवमेंट, हमारी अपनी संचार सेवाओं को धता बताते हुए नेपाली संचार सेवा निर्बाध रूप से चलती है। 2013 के आपदा राहत के काम में लगी भारतीय एजेंसियों ने नेपाल की संचार कंपनी नमस्ते और स्काई का ही प्रयोग किया था। नेपाली संचार प्रबंध इतना पुख्ता था कि उसमें किसी प्रकार की कोई खराबी नहीं आई। भारतीय मीडिया से जुड़े लोगों के लिए भी यही नेपाली सिम मददगार साबित हुए।
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 दूसरी तरफ भारत संचार निगम की सेवाएं आपदा के समय पूरे एक माह ठप रही थी। संचार क्रांति के मामले में हिंदुस्तान खुद को काफी आगे होने का दावा करता आ रहा है लेकिन कम से कम सीमांत के इस इलाके में उसका यह दावा खोखला नजर आता है। इतना ही नहीं इन तीन सालों में बीएसएनएल ने अपनी सुविधाओं को दुरुस्त करने की कोशिश भी नहीं की, जिसके चलते आज भी यहां नेपाली संचार सेवाओं के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
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नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग हर महकमा नेपाली मोबाइल सेवाओं का उपयोग कर रहा है। 120 किमी की विस्तार वाले क्षेत्र में भारत सरकार की एकमात्र बीएसएनएल सेवा का सीमित नेटवर्क के साथ उपलब्ध है तथा अभी भी भारत-चीन सीमा तथा भारत-नेपाल सीमा पर बसे भारतीय गांवों में संचार सेवाएं नहीं हैं। नेपाल के सुदूर पश्चिम के राप्ला, दुमलिंग, छांगरू, तिंकर आदि गांव संचार सुविधाओं से लेस हैं। यहां के गरीब मजदूरों के हर हाथ में मोबाइल इनको मुख्यधारा से जोड़े हुए हैं। वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय लोगों के साथ ही सरकारी महकमे भी नेपाल की संचार सेवाओं के आकर्षण से अछूते नहीं रहे हैं। कमोबेश लगभग हर सरकारी महकमे के लोगों को नेपाली सिम का उपयोग कर अपने घर और करीबियों से बात करते रहते हैं।
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इधर, व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि व्यापरियोें के कड़े संघर्ष के बाद वर्ष 2009 में मोबाइल सेवा शुरू की गई थी लेकिन यह सेवा मात्र नगर तक ही सीमित हो कर रह गई। आज भी दारमा घाटी के 14 गांव, चौदांस घाटी के 14 गांव तथा व्यास घाटी के सात गांवों में भारतीय संचार कंपनियों की कोई सेवा नहीं है। इन गांवों के लोगों के लिए नेपाल की संचार कंपनियों का ही सहारा है। रांथी, जुम्मा, खेला, छिपलाकोट, पय्यांपौड़ी के स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में नेपाली संचार सेवाओं को उपयोग कर रहे हैं। 

 
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