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बर्ड वॉचिंग के लिए फरवरी-मार्च में मुनस्यारी पैक
Wed, 30 Jan 2019 12:23 AM IST
kamlesh kamlesh
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:23 AM IST
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मोनाल।
- फोटो : AMAR UJALA
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उच्च हिमालयी क्षेत्र की खूबसूरत चिड़ियाओं को देखने के लिए इस बार मुनस्यारी में खासी संख्या में बर्ड वॉचर पहुंचेंगे। फरवरी और मार्च माह के लिए अभी से मुनस्यारी पूरी तरह से पैक हो चुका है।
मुनस्यारी में पक्षियों की करीब 340 प्रजातियां चिह्नित की गई हैं। तीन वर्ष पूर्व मोनाल संस्था ने पहली बार बेटुलीधार में बर्ड वॉचिंग की थी। तब सत्पर ट्रेगोपान जिसे स्थानीय भाषा में लॉग कहा जाता है यहां देखी थी। पिछले कुछ वर्षों तक सातताल और पंगोट में ही बर्ड वाचिंग होती थी। अब मुनस्यारी खूबसूरत पक्षियों का दीदार करने वालों के लिए पसंदीदा स्थल बन रहा है। मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि इन दिनों ग्लेशियरों में निवास करने वाले पक्षी मोनाल, रेड फ्रटेड रोज फिंच, स्नोकॉक, स्नोपार्टेज झुंड के रूप में नीचे की ओर आ रहे हैं। इन पक्षियों के लिए खलिया टॉप बेहतरीन स्थल है। नंदा देवी मंदिर क्षेत्र (2200 मीटर) ऊपरी क्षेत्रों की छोटी चिड़ियां रोजफिंच की चहचहाहट से गूंज रही है। बलाती फार्म, दरकोट में भी काफी संख्या में चिड़ियां देखी जा रही हैं।
पंवार ने बताया कि फरवरी और मार्च में बर्ड वाचिंग के लिए दिल्ली, बंगलुरु, पुणे, कोलकाता के पर्यटकों ने पहले से ही बुकिंग करा ली है। एक समय में सात-आठ पर्यटकों को इन पक्षियों के दीदार कराए जाते हैं। इसमें छह दिन का समय लगता है। अभी तक नौ बर्ड वॉचर ग्रुपों की बुकिंग हो चुकी है।
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मुनस्यारी में पक्षियों की करीब 340 प्रजातियां चिह्नित की गई हैं। तीन वर्ष पूर्व मोनाल संस्था ने पहली बार बेटुलीधार में बर्ड वॉचिंग की थी। तब सत्पर ट्रेगोपान जिसे स्थानीय भाषा में लॉग कहा जाता है यहां देखी थी। पिछले कुछ वर्षों तक सातताल और पंगोट में ही बर्ड वाचिंग होती थी। अब मुनस्यारी खूबसूरत पक्षियों का दीदार करने वालों के लिए पसंदीदा स्थल बन रहा है। मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि इन दिनों ग्लेशियरों में निवास करने वाले पक्षी मोनाल, रेड फ्रटेड रोज फिंच, स्नोकॉक, स्नोपार्टेज झुंड के रूप में नीचे की ओर आ रहे हैं। इन पक्षियों के लिए खलिया टॉप बेहतरीन स्थल है। नंदा देवी मंदिर क्षेत्र (2200 मीटर) ऊपरी क्षेत्रों की छोटी चिड़ियां रोजफिंच की चहचहाहट से गूंज रही है। बलाती फार्म, दरकोट में भी काफी संख्या में चिड़ियां देखी जा रही हैं।
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पंवार ने बताया कि फरवरी और मार्च में बर्ड वाचिंग के लिए दिल्ली, बंगलुरु, पुणे, कोलकाता के पर्यटकों ने पहले से ही बुकिंग करा ली है। एक समय में सात-आठ पर्यटकों को इन पक्षियों के दीदार कराए जाते हैं। इसमें छह दिन का समय लगता है। अभी तक नौ बर्ड वॉचर ग्रुपों की बुकिंग हो चुकी है।
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