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Pithoragarh News: पहाड़ में स्वास्थ्य की पहाड़ जैसी समस्या
Wed, 02 Aug 2023 10:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 02 Aug 2023 10:18 PM IST
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सीएचसी डीडीहाट में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासांउड कराने की जानकारी देती एएनएम। संवाद
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। पर्वतीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा पाने के लिए पहाड़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए देहरादून और दिल्ली में योजना बनाने वालों को पहाड़ के लोगों की विवशता नजर नहीं आती है। पहाड़ की गर्भवतियों को अपना और गर्भ में पहल रहे बच्चे का नौ माह तक मुश्किल हालातों में खयाल रखना पड़ता है।
डीडीहाट में गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। गर्भवती को पहले 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलकर डीडीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड के लिए 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसमें तमाम दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को लेकर बुधवार को पड़ताल की गई।
सुबह नौ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची लधड़ा गांव निवासी गर्भवती कविता देवी ने बताया कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए सात किमी पैदल चलकर गांव से अस्पताल पहुंची हैं। तीन माह के बाद गर्भ में पल रहे बच्चे की जानकारी के लिए अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी होता है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए उन्हें पिथौरागढ़ जिला अस्पताल जाना होगा। इसमें एक से दो हजार रुपये खर्चा आएगा। यही स्थिति कूटा गांव से सीएचसी पहुंची गर्भवती बबीना और लधड़ा गांव की ही भावना का भी थी। कूटा से दस किमी की पैदल दूरी तय कर डीडीहाट पहुंची बबीना को भी अल्ट्रासाउंड के लिए कहा गया। बबीना ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिथौरागढ़ जाना होगा। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में आवाजाही में काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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एक माह में डीडीहाट सीएचसी में 25 से 30 गर्भवतियां जांच कराने पहुंचती हैं। उन्हें गर्भधारण के तीसरे और आठवें महीने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिथौरागढ़ भेजा जाता है। भारी बारिश और मुश्किल हालात में गर्भवती सीएचसी तो पहुंच रही हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें काफी मुश्किल आ रही है।
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खुशियों की सवारी में डीजल नहीं
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सरकार ने गर्भवतियों के लिए खुशियों की सवारी नामक योजना शुरू की थी। पिछले कई महीनों से खुशियों की सवारी डीजल उपलब्ध नहीं होने के कारण खड़ी है। गर्भवतियों को निजी खर्च पर ही प्रसव कराना पड़ रहा है। खुशियों की सवारी तभी किसी गर्भवती को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर ले जाती है, जब छह गर्भवतियों को एक साथ अल्ट्रासाउंड के लिए जाना हो। डीजल नहीं होने के कारण खुशियों की सवारी का फायदा गर्भवतियों को नहीं मिल रहा है। संवाद
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डीडीहाट में गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। गर्भवती को पहले 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलकर डीडीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड के लिए 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसमें तमाम दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को लेकर बुधवार को पड़ताल की गई।
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सुबह नौ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची लधड़ा गांव निवासी गर्भवती कविता देवी ने बताया कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए सात किमी पैदल चलकर गांव से अस्पताल पहुंची हैं। तीन माह के बाद गर्भ में पल रहे बच्चे की जानकारी के लिए अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी होता है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए उन्हें पिथौरागढ़ जिला अस्पताल जाना होगा। इसमें एक से दो हजार रुपये खर्चा आएगा। यही स्थिति कूटा गांव से सीएचसी पहुंची गर्भवती बबीना और लधड़ा गांव की ही भावना का भी थी। कूटा से दस किमी की पैदल दूरी तय कर डीडीहाट पहुंची बबीना को भी अल्ट्रासाउंड के लिए कहा गया। बबीना ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिथौरागढ़ जाना होगा। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में आवाजाही में काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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एक माह में डीडीहाट सीएचसी में 25 से 30 गर्भवतियां जांच कराने पहुंचती हैं। उन्हें गर्भधारण के तीसरे और आठवें महीने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिथौरागढ़ भेजा जाता है। भारी बारिश और मुश्किल हालात में गर्भवती सीएचसी तो पहुंच रही हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें काफी मुश्किल आ रही है।
खुशियों की सवारी में डीजल नहीं
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सरकार ने गर्भवतियों के लिए खुशियों की सवारी नामक योजना शुरू की थी। पिछले कई महीनों से खुशियों की सवारी डीजल उपलब्ध नहीं होने के कारण खड़ी है। गर्भवतियों को निजी खर्च पर ही प्रसव कराना पड़ रहा है। खुशियों की सवारी तभी किसी गर्भवती को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर ले जाती है, जब छह गर्भवतियों को एक साथ अल्ट्रासाउंड के लिए जाना हो। डीजल नहीं होने के कारण खुशियों की सवारी का फायदा गर्भवतियों को नहीं मिल रहा है। संवाद