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मोदी लहर में भी कांग्रेस के साथ डटा रहा धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 11 Jan 2017 10:37 PM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों के बाद से धारचूला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस अजेय बनी हुई है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में भी धारचूला के वोटर कांग्रेस के साथ थे। लोकसभा चुनाव के मात्र दो महीने बाद हुए उप चुनाव में भी धारचूला के लोगों ने कांग्रेस का साथ दिया।
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हरीश धामी ने 5306 मतों से धारचूला में विजय हासिल की थी। तब 12 प्रत्याशी मैदान में थे। धामी को 15739, भाजपा के खुशाल सिंह पिपलिया को 10433, उक्रांद के काशी सिंह ऐरी को 6685, बसपा के राजेंद्र सिंह को 4389, निर्दलीय गगन सिंह को 2990, उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के वीरेंद्र पाल को 2347, भाकपा माले के जगत मर्तोलिया को 1864, निर्दलीय शंकर लाल को 1131, निर्दलीय लक्ष्मी दत्त पंत को 626, निर्दलीय जीवन सिंह को 479, निर्दलीय गोविंद सिंह को 374, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के दिनेश सिंह को 361 मत मिले थे।
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मई 2014 में लोकसभा चुनाव हुए। धारचूला विधानसभा क्षेत्र के वोटर तब भी कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दिए। धारचूला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा को 2520 वोटों की बढ़त मिली थी। प्रदीप को 20398, भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा को 17878 मत मिले थे। शेष सात प्रत्याशी 700 से भी कम वोटों में सिमट गए। लोकसभा चुनावों के बाद धारचूला के विधायक धामी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए सीट छोड़ी। जुलाई 2014 में हुए उप चुनाव में एक बार फिर धारचूला के लोग कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े दिखे। उप चुनाव में मुख्यमंत्री हरीश रावत और भाजपा के विष्णु दत्त के बीच सीधा मुकाबला था। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 20699 वोटों से जीत दर्ज की। हरीश रावत को 31207, भाजपा प्रत्याशी को 10608 मत मिले। पिछले तीन चुनावों के परिणाम से कांग्रेस को धारचूला में मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल है।
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नोटा का भी रहा जोर
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रत्याशियों को नापसंद करने के विकल्प के तौर पर नोटा का प्रावधान किया गया था। लोकसभा चुनाव में धारचूला विधानसभा सीट के 717 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। वर्ष 2014 में ही हुए विधानसभा के उप चुनाव में विधानसभा क्षेत्र के 1028 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। तब मुख्यमंत्री हरीश रावत भी चुनाव मैदान में थे।