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25 लाख की लागत से खरीदा गया सचल चिकित्सा वाहन 4 साल से धूल फांक रहा
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मुनस्यारी अस्पताल में खड़ा सचल चिकित्सा वाहन।
- फोटो : PITHORAGARH
मुनस्यारी (प्रमोद द्विवेदी)। विकासखंड में बीएडीपी योजना के तहत लाखों की लागत से खरीदा गया सचल चिकित्सा वाहन सफेद हाथी बनकर रह गया है। वाहन में एक्स-रे, पैथोलॉजी, जनरेटर की सुविधा उपलब्ध है, बावजूद इसके वाहन धूल फांक रहा है।
बीएडीपी योजना के तहत चार वर्ष पूर्व 25 लाख की लागत से एक सचल वाहन खरीदा गया था। उम्मीद थी कि गांव-गांव के लोगों को घर के पास ही यह तमाम सुविधाएं मिलेंगी। खरीदे जाने के बाद पांच माह तक वाहन सीएमओ कार्यालय में खड़ा रहा। इसके बाद स्थानीय लोगों की मांग पर इसे मुनस्यारी पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर के साथ ही एक्स-रे संचालन के लिए तकनीशियन और पैथोलोजिस्ट नहीं होने से इसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। वाहन के लिए चालक तक नहीं है। दो वर्ष पूर्व इसे सीएमओ के निर्देशानुसार गंगोलीहाट भेजा गया। गंगोलीहाट भेजे जाने पर स्थानीय लोगों के विरोध स्वरूप वाहन एक बार पुन: मुनस्यारी तो आया लेकिन ये वाहन संचालन और व्यवस्थाओं के अभाव में अब भी धूल फांक रहा है। साथ ही लाखों की मशीनों को जंग भी लग रहा है।
25 लाख से जनता को राहत देने के लिए इस वाहन को खरीदा गया था परंतु विभाग जरूरी व्यवस्था करना भूल गया। सरकार को सचल चिकित्सा वाहन संचालन के लिए चालक, तकनीशियन और चिकित्सक की नियुक्ति करनी चाहिए। - हीरा चिराल, पूर्व विधायक प्रतिनिधि
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वाहन चालू हालत में है। एक्स रे और पैथोलॉजी तकनीशियन की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। व्यवस्था होने पर वाहन का संचालन किया जाएगा। - डॉ. दिनेश चंदोला, प्रभारी चिकित्साधिकारी, मुनस्यारी
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बीएडीपी योजना के तहत चार वर्ष पूर्व 25 लाख की लागत से एक सचल वाहन खरीदा गया था। उम्मीद थी कि गांव-गांव के लोगों को घर के पास ही यह तमाम सुविधाएं मिलेंगी। खरीदे जाने के बाद पांच माह तक वाहन सीएमओ कार्यालय में खड़ा रहा। इसके बाद स्थानीय लोगों की मांग पर इसे मुनस्यारी पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर के साथ ही एक्स-रे संचालन के लिए तकनीशियन और पैथोलोजिस्ट नहीं होने से इसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। वाहन के लिए चालक तक नहीं है। दो वर्ष पूर्व इसे सीएमओ के निर्देशानुसार गंगोलीहाट भेजा गया। गंगोलीहाट भेजे जाने पर स्थानीय लोगों के विरोध स्वरूप वाहन एक बार पुन: मुनस्यारी तो आया लेकिन ये वाहन संचालन और व्यवस्थाओं के अभाव में अब भी धूल फांक रहा है। साथ ही लाखों की मशीनों को जंग भी लग रहा है।
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25 लाख से जनता को राहत देने के लिए इस वाहन को खरीदा गया था परंतु विभाग जरूरी व्यवस्था करना भूल गया। सरकार को सचल चिकित्सा वाहन संचालन के लिए चालक, तकनीशियन और चिकित्सक की नियुक्ति करनी चाहिए। - हीरा चिराल, पूर्व विधायक प्रतिनिधि
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वाहन चालू हालत में है। एक्स रे और पैथोलॉजी तकनीशियन की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। व्यवस्था होने पर वाहन का संचालन किया जाएगा। - डॉ. दिनेश चंदोला, प्रभारी चिकित्साधिकारी, मुनस्यारी