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माइग्रेशन गांवों के लोगों को इस बार दिक्कत होगी
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Mon, 20 Mar 2017 10:50 PM IST
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गर्वाधार से लखनपुर तक सड़क के मलबे से नष्ट हुआ पैदल रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
अगले महीने से माइग्रेशन गांवों को लौटने वालों को इस बार भारी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। गर्बाधार से लखनपुर के बीच चल रहे सड़क निर्माण के दौरान निकला सारा मलबा पैदल रास्ते में गिर रहा है। इस कारण माइग्रेशन गांव बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रौंगकांग, कुटी गांवों को लौटने वालों के सामने भारी दिक्कत आने वाली है। सीमा सड़क संगठन इन दिनों तिब्बत सीमा तक मोटर सड़क पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रहा है। गर्बाधार से लखनपुर के बीच कठोर चट्टान को काटने के बाद सारा मलबा पैदल रास्ते को तोड़ता जा रहा है। सीमा सड़क संगठन ने पैदल रास्ते का मलबा हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
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रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल, भाजपा नेता महेंद्र बुदियाल, जिला पंचायत सदस्य मंजुला बुदियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह, प्रधान पुष्पा देवी, बूंदी की प्रधान लक्ष्मी रायपा, नपलच्यू के प्रधान गंगोत्री देवी, गुंजी की प्रधान अर्चना देवी रौंगकांग के प्रधान हरीश रौंकली, नाबी की प्रधान सनम देवी, कुटी की प्रधान सरिता देवी आदि ने इस दुर्गम चट्टान के कटने पर खुशी व्यक्त की है। साथ ही मांग की है कि अप्रैल में माइग्रेशन शुरू होने से पूर्व पैदल मार्ग आवाजाही के लिए तैयार किया जाए, क्योंकि सड़क कटिंग कार्य के चलते पुराना अश्व मार्ग टूट चुका है और लखनपुर से आगे का रास्ता बेहद खतरनाक बना है। इस कारण माइग्रेशन पर जाने वाले लोग फंस जाएंगे। सीमा सड़क संगठन के स्थानीय अधिकारी इस समस्या के बारे में कुछ नहीं बता रहे हैं।
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