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Pithoragarh News: देवी-देवताओं के डोलों के मिलन के साथ ही संपन्न हुआ चैतोल पर्व
Thu, 06 Apr 2023 11:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 06 Apr 2023 11:57 PM IST
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पिथौरागढ़। सोरघाटी का प्रमुख चैतोल पर्व नगर के घंटाकरण में देवलसमेत देवता और देवी के डोलों के मिलन के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर आशीर्वाद लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे।
बृहस्पतिवार को सोर क्षेत्र में आयोजित चैतोल पर्व के दूसरे दिन बिण के तपस्यूड़ा मंदिर से देवछत्र निकला। छत्र के साथ भारी संख्या में ग्रामीण ध्वज, पताकाओं को लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ चल रहे थे। सभी गांवों में देवलसमेत की पूजा-अर्चना की गई और गांवों में निकले डोलों और छत्र का मिलन हुआ। इसे भाई-बहन का मिलन माना जाता है। ग्रामीण देवछत्र के साथ जुड़ते रहे। दोपहर बाद गांवों में घूमने के उपरांत छत्र तपस्यूड़ा लौटा। यहां पर मध्याह्न स्नान के बाद भोजन की व्यवस्था हुई। शाम को यहां पर फिर अनुष्ठान हुए और देवडांगर में देवता का अवतरण हुआ। फिर देवता का डोला निकला।
बिण चैसर से निकला डोला कुमौड़ और जाखनी पहुंचा। गांव के मंदिर में पारंपरिक पूजा हुई। यहां पर देवडांगरों में देवता अवतरित हुए। बाद में डोला कुमौड़ से तल्ली मल्ली जाखनी पहुंचा। जाखनी से डोला नगर के मध्य सिल्थाम होते हुए सायं को घंटाकरण स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचे। इससे पूर्व नगर के लिंठ्यूड़ा गांव में मां भगवती की पारंपरिक ढंग से पूजा अर्चना हुई। शाम को गांव से देवी का डोला घंटाकरण के लिए निकला। बिण चैसर और जाखनी से डोलों के पहुंचते ही तीनों डोलों का मिलन हुआ। भाई और बहन आपस में गले मिले। मिलन के बाद लिंठ्यूड़ा, बिण, जाखनी के डोले भी अपने गांव लौटे।
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गौरंगघाटी में भी चैतोल पर्व धूमधाम से मनाया गया। नैकिना गांव स्थित वैष्णवी मंदिर से चैतोल शुरू हुई। भुरमुनी तड़ाग गांव में देव अवतरित हुए। द्यौताल में स्नान करने के बाद वापस वैष्णवी मंदिर में समापन हुआ। इस मौके पर देवडांगरों में मोस्टा देवता, असुरेश्वर बाबा, भूमिया, कैराल बाबा अवतरित हुए। इधर जाखपंत, बिलई और खूनी गांव में भी चैतोल पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। खूनीगांव से छात सेली, मूलागाड़, देवल, सातशिलिंग, सल्मोड़ा, गेठना, सुजई के भ्रमण के बाद वापस खूनी गांव पहुंचा। पुजारी श्रीधर जोशी ने बताया कि यहां जगराता किया गया। जिसमें देवडांगरों ने अवतरित होकर आशीर्वाद दिया।
पंचकोटी देवताओं ने दिया मां जयंती को भिटोला
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। सतगढ़ में चैतोल पर्व की धूम रही। श्रद्धालुओं ने मां जयंती की छातों को गांव में स्थित विभिन्न मंदिरों की परिक्रमा के बाद मां जयंती के दरबार ध्वज पहुंचाई। यहां पर देव डंगरियों ने अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। मां जयंती को भिटोला देने के लिए भक्तों ने पंचकोटी देवस्थल पर माता के छातों को विधिवत पूजा अर्चना के बाद ध्वज मंदिर पहुंचाया। यहां पर मंदिर की परिक्रमा पूरी करने के बाद देवडांगरों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद भक्तों ने मां की छातों को घने जंगल से होते हुए देवकपड़ा, खतेड़ा, मजेड़ा से पंचकोटी देवस्थल पहुंचाया। यहां पर मलयनाथ, कासिन, छुरमल, बेताल, खंडेनाथ, बुड़कासिन, गोरिल, असुर, लटुवा, खंडेनाथ देवताओं के डंगरियों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। संवाद
बृहस्पतिवार को सोर क्षेत्र में आयोजित चैतोल पर्व के दूसरे दिन बिण के तपस्यूड़ा मंदिर से देवछत्र निकला। छत्र के साथ भारी संख्या में ग्रामीण ध्वज, पताकाओं को लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ चल रहे थे। सभी गांवों में देवलसमेत की पूजा-अर्चना की गई और गांवों में निकले डोलों और छत्र का मिलन हुआ। इसे भाई-बहन का मिलन माना जाता है। ग्रामीण देवछत्र के साथ जुड़ते रहे। दोपहर बाद गांवों में घूमने के उपरांत छत्र तपस्यूड़ा लौटा। यहां पर मध्याह्न स्नान के बाद भोजन की व्यवस्था हुई। शाम को यहां पर फिर अनुष्ठान हुए और देवडांगर में देवता का अवतरण हुआ। फिर देवता का डोला निकला।
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बिण चैसर से निकला डोला कुमौड़ और जाखनी पहुंचा। गांव के मंदिर में पारंपरिक पूजा हुई। यहां पर देवडांगरों में देवता अवतरित हुए। बाद में डोला कुमौड़ से तल्ली मल्ली जाखनी पहुंचा। जाखनी से डोला नगर के मध्य सिल्थाम होते हुए सायं को घंटाकरण स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचे। इससे पूर्व नगर के लिंठ्यूड़ा गांव में मां भगवती की पारंपरिक ढंग से पूजा अर्चना हुई। शाम को गांव से देवी का डोला घंटाकरण के लिए निकला। बिण चैसर और जाखनी से डोलों के पहुंचते ही तीनों डोलों का मिलन हुआ। भाई और बहन आपस में गले मिले। मिलन के बाद लिंठ्यूड़ा, बिण, जाखनी के डोले भी अपने गांव लौटे।
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गौरंगघाटी में भी चैतोल पर्व धूमधाम से मनाया गया। नैकिना गांव स्थित वैष्णवी मंदिर से चैतोल शुरू हुई। भुरमुनी तड़ाग गांव में देव अवतरित हुए। द्यौताल में स्नान करने के बाद वापस वैष्णवी मंदिर में समापन हुआ। इस मौके पर देवडांगरों में मोस्टा देवता, असुरेश्वर बाबा, भूमिया, कैराल बाबा अवतरित हुए। इधर जाखपंत, बिलई और खूनी गांव में भी चैतोल पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। खूनीगांव से छात सेली, मूलागाड़, देवल, सातशिलिंग, सल्मोड़ा, गेठना, सुजई के भ्रमण के बाद वापस खूनी गांव पहुंचा। पुजारी श्रीधर जोशी ने बताया कि यहां जगराता किया गया। जिसमें देवडांगरों ने अवतरित होकर आशीर्वाद दिया।
पंचकोटी देवताओं ने दिया मां जयंती को भिटोला
कनालीछीना(पिथौरागढ़)। सतगढ़ में चैतोल पर्व की धूम रही। श्रद्धालुओं ने मां जयंती की छातों को गांव में स्थित विभिन्न मंदिरों की परिक्रमा के बाद मां जयंती के दरबार ध्वज पहुंचाई। यहां पर देव डंगरियों ने अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। मां जयंती को भिटोला देने के लिए भक्तों ने पंचकोटी देवस्थल पर माता के छातों को विधिवत पूजा अर्चना के बाद ध्वज मंदिर पहुंचाया। यहां पर मंदिर की परिक्रमा पूरी करने के बाद देवडांगरों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद भक्तों ने मां की छातों को घने जंगल से होते हुए देवकपड़ा, खतेड़ा, मजेड़ा से पंचकोटी देवस्थल पहुंचाया। यहां पर मलयनाथ, कासिन, छुरमल, बेताल, खंडेनाथ, बुड़कासिन, गोरिल, असुर, लटुवा, खंडेनाथ देवताओं के डंगरियों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। संवाद