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शहीद के परिजनों को मिलने वाले रुपए का सही इस्तेमाल करें
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Tue, 29 Nov 2016 10:28 PM IST
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शहीद चंद्र सिंह की वीरांगना को सांत्वना देते कर्नल गुलेरिया
- फोटो : अमर उजाला
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सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष दर्जा राज्यमंत्री कर्नल एसपी गुलेरिया ने मंगलवार को शहीद चंद्र सिंह के गांव पाली जाकर उनकी पत्नी चंद्रकला को समझाया कि सेना और सरकार की ओर से अब जो भी आर्थिक सहायता दी जाएगी, उसका सही इस्तेमाल करें। उन्होंने पैसे के निवेश के बारे में बताया कि इस राशि को बैंक खाते में ही जमा करें और बेटियों की पढ़ाई पर खर्च करें।
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कर्नल गुलेरिया ने शहीदों को सेेना की ओर से दिए जाने वाले पदक और उस पदक के एवज में मिलने वाली राशि का पूरा ब्योरा शहीद की पत्नी को सौंपा। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए महान बलिदान है और सेना शहीद को किसी पदक से जरूर सम्मानित करेगी। अपनी पत्नी भावना गुलेरिया के साथ पाली गांव पहुंचे कर्नल गुलेरिया ने कहा कि अक्सर पैसा आने के बाद उसे निवेश करने के लिए तरह-तरह के लोग सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि किसी के भी झांसे में आने की जरूरत नहीं है।
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कर्नल गुलेरिया ने कहा कि यदि कागजात तैयार करने में किसी प्रकार की कठिनाई आएगी तो वह उसे हल करने के लिए हर वक्त तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि शहीद चंद्र सिंह ने जो वीरता दिखाई थी उसे पूरा देश याद रखेगा। कर्नल गुलेरिया ने शहीद की माता कौशल्या देवी, भाई साधो सिंह, भगत सिंह से भी मुलाकात की।
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वारदात के दिन दिया था हवलदार का इंटरव्यू
शहीद नायक चंद्र सिंह का हवलदार पद पर प्रमोशन होना था। वह हवलदार पद की लिखित परीक्षा पास कर चुके थे और 25 नवंबर को जिस दिन यह वारदात हुई, उसी दिन सुबह वह हवलदार पर का इंटरव्यू देकर आए थे। इंटरव्यू देने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को तत्काल यह खुशखबरी दी थी कि इंटरव्यू काफी अच्छा रहा।
दो दिसंबर को आना था छुट्टी में घर
शहीद की पत्नी चंद्रकला ने बताया कि दो दिसंबर को चंद्र सिंह छुट्टी पर घर आने वाले थे। उन्होंने छुट्टी के लिए अर्जी लगा रखी थी। चंद्र सिंह रोज शाम को अपने बच्चों से फोन पर बात करते और पूछते थे कि आज क्या खाना बनाया, बेटियों ने होमवर्क किया या नहीं, मौसम कैसा हो रहा है आदि। वह हमेशा बच्चों से बात करते थे।
शहीद का क्रियाकर्म शुरू हुआ
शहीद का अंतिम संस्कार होने के बाद पाली गांव में उनका क्रियाकर्म शुरू हो गया है। शहीद के छोटे भाई साधो सिंह क्रियाकर्म में बैठे हैं, जबकि बड़ा भाई भगत सिंह भी उनके साथ ही बैठा रहता है। गांव तथा पास पड़ोस के कई लोग सांत्वना देने के लिए लगातार गांव पहुंच रहे हैं। परिवार के लोग अब भी गम में डूबे हैं।