{"_id":"597b6bbe4f1c1b9f348b4582","slug":"madan-of-pithoragarh-became-counselor-general-in-kandahar","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिथौरागढ़ के मदन कंधार में काउंसलर जनरल बने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिथौरागढ़ के मदन कंधार में काउंसलर जनरल बने
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 28 Jul 2017 10:22 PM IST
विज्ञापन
कंधार के गर्वनर से मिलते काउंसलर जनरल मदन भंडारी
- फोटो : अमर उजाला
कनालीछीना तहसील के अंतर्गत पीपली क्षेत्र के एक छोटे से गांव स्यूबन निवासी मदन सिंह भंडारी अफगानिस्तान के कंधार में काउंसलर जनरल (महान्यायवादी) बन गए हैं। उन्होंने 26 जुलाई को कंधार के गवर्नर हुमायूं अजीज के समक्ष पदभार ग्रहण किया। मदन भंडारी ने 1985 में दिल्ली में विदेश मंत्रालय में स्टेनो पद से सेवा शुरू की। उसके बाद वह अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ते गए। वह पिछले वर्ष तक नेपाल दूतावास में प्रथम श्रेणी सचिव के पद पर तैनात रहे। उससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, नार्वे और कनाडा में भारतीय दूतावासों में भी बड़े पदों पर सेवाएं दीं।
विज्ञापन
मदन सिंह भंडारी के पिता प्रताप सिंह भंडारी दिल्ली पुलिस में निरीक्षक थे। मदन की पढ़ाई दिल्ली में ही हुई। स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद उनको विदेश मंत्रालय में नौकरी मिल गई। 57 वर्षीय मदन के काउंसलर जनरल बनने की सूचना स्यूबन गांव तक पहुंच गई है। पिथौरागढ़ के कुमौड़ गांव में रहने वाले उनके चाचा गगन सिंह भंडारी के आवास पर खुशी का माहौल है। उन्होंने मिठाई बांटी। गगन सिंह ने बताया कि मदन के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव नेपाल दूतावास में प्रथम श्रेणी सचिव बनने के बाद ही आया। गगन सिंह कहते हैं कि मदन की यह उपलब्धि पूरे जिले और राज्य के लिए गौरव का विषय है।
विज्ञापन
जून में स्यूबन गांव गए थे मदन
मदन भंडारी को अपने गांव से बड़ा लगाव रहा है। वह जून में अपने गांव गए और इष्टदेवता के मंदिर में पूजा की। मदन के चाचा गगन सिंह भंडारी ने बताया कि मंदिर में पूजा के लिए वह हर साल गांव आते हैं। इस बार जून में वह इसलिए गांव आए, क्योंकि उनको कंधार में काउंसलर जनरल पद संभालने के लिए जाना था। भतीजे से गगन सिंह की अक्सर बात होती रहती है।
विज्ञापन
स्यूबन में पांच परिवार रहते हैं
स्यूबन गांव में भंडारी बिरादरी के अब सिर्फ पांच परिवार रहते हैं। पहले गांव में 22 परिवार रहते थे। अब एक-एक कर इन लोगों ने गांव छोड़ दिया है। मदन के चचेरे भाई सूबेदार राम सिंह भंडारी भी पिथौरागढ़ में ही बस गए हैं। गगन सिंह का कहना है कि गांव में अब कम लोग रहते हैं, लेकिन हर व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ा है। विदेश में काम करने वाले भी वर्ष में एक बार जरूर गांव आते हैं।