Pithoragarh: न्याय की देवी की शरण में कोटगाड़ी पहुंचे एलटी चयनित अभ्यर्थी, माता के दरबार पर अर्जी रखी; पूजा की
एलटी शिक्षक के चयनित अभ्यर्थियों के सब्र का बांध टूट गया है। जब सरकार और अदालत के दर से उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो ये युवा सोमवार को देवी के दरबार में पहुंच गए। न्याय की देवी की मां कोटगाड़ी की शरण में अपना हक मांगने के लिए।
विस्तार
सात महीने से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे एलटी शिक्षक के चयनित अभ्यर्थियों के सब्र का बांध टूट गया है। जब सरकार और अदालत के दर से उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो ये युवा सोमवार को देवी के दरबार में पहुंच गए। न्याय की देवी की मां कोटगाड़ी की शरण में अपना हक मांगने के लिए।
कोटगाड़ी मंदिर में उस समय अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब एलटी चयनित अभ्यर्थियों का एक समूह माता के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचा। सात महीने से नियुक्ति की बाट जोह रहे इन युवाओं ने अब न्यायालयों और सरकारी दफ्तरों से निराश होकर आस्था के ठिकाने की शरण ली है। हाथों में पूजा की थाली और दिल में न्याय की आस लिए ये अभ्यर्थी अपनी पीड़ा बताने आए थे। सबने माता के दरबार में सादे कागज पर अपनी अर्जी रखी और पूजा-अर्चना कर निवेदन किया कि उन्हें शीघ्र न्याय मिले।
अर्जी लगाने वाले युवाओं में गौरव जोशी, गौरव देवराड़ी, मनीष खाती, नवीन नेगी और मनीष काला शामिल रहे जिन्होंने मां कोकिला के चरणों में बैठकर अपने सपनों और संघर्षों को शब्दों में पिरोकर अर्जी के रूप में अर्पित किया। इन युवाओं की आंखों में विश्वास था कि जब इंसानी अदालतें चुप हैं तब देवी की अदालत जरूर बोलेगी।
मामला
अभ्यर्थियों ने बताया कि एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा पिछले साल अगस्त में आयोजित की गई थी। परिणाम 10 जनवरी को आया और 13 से 28 जनवरी के बीच दस्तावेज़ सत्यापन भी संपन्न हो गया। चयन सूची 9 फरवरी को शिक्षा विभाग को भेज दी गई थी। परन्तु कुछ असंतुष्ट अभ्यर्थियों द्वारा न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के चलते अब तक नियुक्ति प्रक्रिया लटकी हुई है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से न्यायालय में प्रभावी पैरवी नहीं हो रही, जिससे उनका मामला हाईकोर्ट में लंबित पड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई बार शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और अधिकारियों से मिल चुके हैं लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन मिला है समाधान नहीं।
मान्यता
कोटगाड़ी देवी को न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इन्हें कोकिला माता के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर पिथौरागढ़ से 55 किलोमीटर और डीडीहाट से 23 किलोमीटर दूर थल के पास पांखू गांव में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए थल से आगे 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जब लोगों को कहीं से न्याय नहीं मिलता है तब वह इस न्याय के दरबार में आकर सादे कागज में अपनी अर्जी लगाते हैं। कोटगाड़ी माता में लोग डाक द्वारा भी अर्जी दाखिल करते हैं।