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Pithoragarh News: नौले को दूषित होने से बचाने के लिए लगाया ताला, पाइप से मिलेगा पानी
Wed, 28 Aug 2024 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 28 Aug 2024 10:52 PM IST
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अस्कोट के हिनकोट में नौले में लगा दरवाजा। संवाद
अस्कोट (पिथौरागढ़)। क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने वाले कत्यूरी काल के नौले के पानी को दूषित होने से बचाने के लिए इसमें दरवाजे लगाकर बंद कर दिया है। अब नौले से पाइप के जरिए ही लोगों को पानी मिलेगा। हिनकोट के प्रधान बहादुर सिंह बिष्ट ने यह पहल करते हुए अन्य लोगों से भी नौलों को दूषित होने से बचाने की अपील की है।
सन 1279 में कत्यूर घाटी के तत्कालीन राजा अभय देव पाल ने अस्कोट के लखनपुर में अपनी राजधानी स्थापित कर क्षेत्र में पानी की समस्या को देखते हुए हर गांव में नौले-धारों का निर्माण कराया था। 90 वर्ष के पुरुषोत्तम उपाध्याय बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता से सुना था कि पहले नौले खुले होते थे जिसमें मवेशी, जंगली जानवर पानी को दूषित कर देते थे। बाद में नौलों की चहारदीवारी बनाने का कार्य किया गया। उपाध्याय के अनुसार राज परिवार ने 1500 से अधिक नौलों का निर्माण किया था जिसमें लगभग 40 नौले अस्कोट क्षेत्र में ही थे।
अंग्रेजी शासनकाल में 1908 में डिप्टी कमिश्नर कुंवर खड़क बहादुर पाल ने इस नौले का जीर्णोद्धार कराया था। आज भी नौले की दीवार के पत्थर पर इसकी जानकारी लिखी गई है। वर्तमान में यही नौले लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। जब भी जल संकट होता है तब नौले का पानी उपयोग में लाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने नौले पर कपड़े और बर्तन धोना शुरू कर दिया था। इसके चलते नौले को दूषित होने से बचाने के लिए हिनकोट के प्रधान बहादुर सिंह बिष्ट ने नौले में दरवाजा लगाकर इसे बंद कर दिया है। अब पाइप के जरिए लोग नौले के पानी का उपयोग करेंगे, इससे यह दूषित होने से बचेगा।
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सन 1279 में कत्यूर घाटी के तत्कालीन राजा अभय देव पाल ने अस्कोट के लखनपुर में अपनी राजधानी स्थापित कर क्षेत्र में पानी की समस्या को देखते हुए हर गांव में नौले-धारों का निर्माण कराया था। 90 वर्ष के पुरुषोत्तम उपाध्याय बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता से सुना था कि पहले नौले खुले होते थे जिसमें मवेशी, जंगली जानवर पानी को दूषित कर देते थे। बाद में नौलों की चहारदीवारी बनाने का कार्य किया गया। उपाध्याय के अनुसार राज परिवार ने 1500 से अधिक नौलों का निर्माण किया था जिसमें लगभग 40 नौले अस्कोट क्षेत्र में ही थे।
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अंग्रेजी शासनकाल में 1908 में डिप्टी कमिश्नर कुंवर खड़क बहादुर पाल ने इस नौले का जीर्णोद्धार कराया था। आज भी नौले की दीवार के पत्थर पर इसकी जानकारी लिखी गई है। वर्तमान में यही नौले लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। जब भी जल संकट होता है तब नौले का पानी उपयोग में लाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने नौले पर कपड़े और बर्तन धोना शुरू कर दिया था। इसके चलते नौले को दूषित होने से बचाने के लिए हिनकोट के प्रधान बहादुर सिंह बिष्ट ने नौले में दरवाजा लगाकर इसे बंद कर दिया है। अब पाइप के जरिए लोग नौले के पानी का उपयोग करेंगे, इससे यह दूषित होने से बचेगा।
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