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Pithoragarh News: कम हिमपात से इस साल नहीं बने सीजनल ग्लेशियर

Fri, 24 Feb 2023 11:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 24 Feb 2023 11:45 PM IST
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less snow
seasonal glacier
पिथौरागढ़। कम हिमपात होने से इस साल उच्च हिमालयी क्षेत्र में सीजनल ग्लेशियर नहीं बने। ऐसा पहली बार हुआ है जब कम हिमपात के कारण जिले की चीन सीमा से सटी दारमा और व्यास घाटियों में आवाजाही तक प्रभावित नहीं हुई। सीजनल ग्लेशियर नहीं बनने से गर्मियों में हिमालयी नदियों और स्रोतों में पानी की कमी हो सकती है।
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मौसम सामान्य रहा तो शीतकाल में नवंबर से मार्च तक हिमपात होता है। हिमपात से पिथौरागढ़ जिले की धारचूला की दारमा और व्यास घाटियों के अलावा मुनस्यारी के मिलम क्षेत्र में हर साल सीजनल ग्लेशियर बनते हैं। सीजनल ग्लेशियर बड़े गधेरों और ऐसे स्थानों पर बनते हैं जहां पर धूप नहीं पड़ती है। पिछले वर्षों तक बर्फबारी के कारण गधेरों में विशालकाय ग्लेशियर बनने से दिसंबर से फरवरी तक पैदल रास्ते और सड़कें तक बंद हो जाती थीं। इन घाटियों के मूल गांवों तक जाने के लिए मार्च में जेसीबी या अन्य मशीनों से सीजनल ग्लेशियरों को काटकर सड़क बनानी पड़ती थी।
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माइग्रेशन पर जाने वाले ग्रामीणों के लिए रास्ते खोलने के लिए प्रशासन को मजदूर भेजने पड़ते थे। इस साल कम हिमपात होने के कारण पिछले वर्षों की तरह सीजनल ग्लेशियर नहीं बने हैं। कुछ ही स्थानों पर गधेरों में कम बर्फ जमा है। इससे लोग हैरत में हैं। हिमालयी नदियों और भूजल स्तर बढ़ाने में सीजनल ग्लेशियरों की विशेष भूमिका रहती है। गर्मी बढ़ने के साथ ही सीजनल ग्लेशियर तेजी के साथ पिघलते हैं। इस कारण ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों और नालों का जल स्तर गर्मियों में बढ़ जाता है। इस साल सीजनल ग्लेशियर नहीं बनने से गर्मियों में नदियों और नालों में पानी की कमी हो सकती है।
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पिछले वर्षों तक दर, बोगलिंग, चलखम, श्यंग्यर, ओरुंग, चल, नागलिंग में सीजनल ग्लेशियर बनते थे। इस साल इन स्थानों पर ग्लेशियर नहीं बने हैं। फरवरी में जो पहाड़ियां बर्फ से लकदक रहती थी उन चोटियों पर भी बर्फ नजर नहीं आई जबकि बर्फबारी से दिसंबर से फरवरी तक घाटी को जाने वाली सड़क बंद हो जाती थी। ग्लोबल वार्मिंग इसका मुख्य कारण हो सकता है। अनियोजित विकास से कई बदलाव आ रहे हैं। कम बर्फबारी के कारण भविष्य में जल संकट पैदा हो सकता है। कम बारिश और बर्फबारी का न होना चिंता का विषय है। -बिशन सिंह बोनाल, सेवानिवृत एडीजी।
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