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Pithoragarh News: सड़क नहीं पहुंची तो पलायन से खाली हो गया लमड़ा गांव

Fri, 29 May 2026 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 29 May 2026 11:31 PM IST
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Lamda village was emptied due to migration as the road did not reach it.
पलायन से खाली हो चुका कनालीछीना विकासखंड का लमड़ा गांव। संवाद
पिथौरागढ़। कनालीछीना के लमड़ा गांव में वीरान घर पलायन रोकने के दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। इस गांव के पलायन का मुख्य कारण सड़क का अभाव रहा है। स्वीकृति के बाद भी सड़क अपनी मंजिल तय नहीं कर पाई तो इसके अभाव में दुश्वारियां झेलकर थक चुके ग्रामीणों ने पलायन करना ही मुनासिब समझा। कभी खुशहाल और समृद्ध गांव में सुनसानी छाई है और वीरान घर अपनों के वापस आने का इंतजार कर रहे हैं।
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विकासखंड मुख्यालय से सिर्फ दो किलोमीटर दूर लमड़ा गांव के लिए वर्ष 2006 में सड़क स्वीकृत हुई। ग्रामीणों को उम्मीद थी गांव तक सड़क पहुंचेगी और उनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों तक पहुंच आसान होगी। लाचार व कमजोर सिस्टम इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में नाकाम साबित हुआ। डोली के सहारे अपनों को अस्पताल पहुंचाने वाले युवाओं का दर्द जागा तो वे बमुश्किल एक किलोमीटर कच्ची सड़क कटवाने में सफल रहे। नैनी गांव तक ही सड़क बनी और यह अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाई। सड़क के अभाव में दुश्वारियां बढ़ती रहीं तो 45 परिवारों को गांव छोड़कर शहरों का रुख करना पड़ा। नतीजनत पलायन से गांव खाली हो गया और अब 50 परिवारों के आबाद गांव में सिर्फ कुछ ही लोग वीरान घरों की देखरेख कर रहे हैं। ग्रामीण ललित उपाध्याय बताते हैं कि गांव में रह रहे गिने-चुने लोगों के मन में सवाल है कि क्या कभी हमारे गांव तक सड़क पहुंचेगी और अपने फिर से वापस लौटेंगे।
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रसीले माल्टा का स्वाद हो गया गुम, बंजर पड़ गए खेत
लमड़ा गांव माल्टा और संतरा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था। इन फलों के स्वाद के पूरे क्षेत्र के लोग दीवाने थे। सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों ने पलायन किया तो इन फलों के पेड़ों ने भी प्राण त्याग दिए। अब बंजर खेतों में इन पेड़ों के अवशेष अपनों के जाने का दर्द बयां कर रहे हैं।
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बदहाल पैदल मार्ग पर तीन जिंदगियां हुईं खत्म
लमड़ा गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों के लिए बीमारों और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना मजबूरी बन गया। बदहाल पैदल रास्ते पर बीमारों के साथ ही डोली पकड़ने वालों की जान बचाना चुनौती था। इस बदहाल पैदल मार्ग पर चट्टान से गिरने से तीन जिंदगियां भी खत्म हो गईं। ऐसे में ग्रामीणों को अपनों के जीवन की चिंता में पलायन करना पड़ा। संवाद


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