{"_id":"59fb508c4f1c1b65548ba9fe","slug":"lake-collector-of-lake-nazrikund-in-chhipalkadar","type":"story","status":"publish","title_hn":"छिपलाकेदार में नाजरीकुंड झील का पानी जमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छिपलाकेदार में नाजरीकुंड झील का पानी जमा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:36 PM IST
विज्ञापन
छिपलाकेदार में जमी हुई नाजरीकुंड झील
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छिपलाकेदार के पास समुद्र सतह से 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाजरीकुंड झील का पानी जम गया है। 29 और 30 अक्तूबर को इस इलाके में जमकर हिमपात हुआ था।
विज्ञापन
छिपलाकेदार पंचाचूली समूह की प्रमुख पहाड़ी है। पंचाचूली में हिमपात होने पर छिपलाकेदार में भी बर्फ पड़ने लगती है। इस बार समय से पहले ही जमकर हिमपात होने से छिपलाकेदार और नाजरीकुंड में तापमान शून्य से पांच डिग्री तक नीचे चला गया है। छिपलाकेदार समुद्र सतह से 3500 मीटर की ऊंचाई पर है। नाजरीकुंड यहां से भी 700 मीटर और ऊंचाई पर स्थित है। छिपलाकेदार की ट्रैकिंग पर गए मुनस्यारी के युवा प्रकाश गोस्वामी, देवेंद्र महर, हीरा सिंह महर, देवेंद्र रावत ने बताया कि नाजरीकुंड का पानी जम गया है। उसके आसपास की पहाड़ी पर काफी बर्फ गिरी है। झील का एक किनारा ही नजर आ रहा है। युवाओं का यह दल बुधवार रात लौटा है। उन्होंने बताया कि छिपलाकेदार जाने वाले रास्ते पर 2500 मीटर की ऊंचाई से ही बर्फ मिलने लगी।
विज्ञापन
छिपलाकेदार की कई बार ट्रैकिंग कर चुके मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि तापमान में ज्यादा गिरावट आने पर पानी जम जाता है। झील का पानी पिछले सालों में भी जमता रहा है लेकिन तब यह स्थिति नवंबर मध्य या दिसंबर से आती थी।
विज्ञापन
समय पर हिमपात होना अच्छे लक्षण
मौसम विज्ञान विभाग के अपर महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा का कहना है कि मुख्य हिमालय में स्थित झीलों और नदियों का शीतकाल में जमना आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने बताया कि हिमपात के बाद पाला गिरना शुरू हो जाता है और बर्फ जल्दी नहीं पिघलती। समय पर हिमपात होना अच्छे लक्षण हैं। इससे ग्लेशियरों और हिमालय से निकलने वाली नदियों को पानी मिलता रहेगा।