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आपदा के कारण खाली हो गया लाछुली गांव

Fri, 29 Sep 2017 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Fri, 29 Sep 2017 10:47 PM IST
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Lachuli village was vacant due to disaster
खाली हो गया आपदा से घिरा लाछुली गांव - फोटो : अमर उजाला

रामगंगा के किनारे स्थित लाछुली गांव अब लगभग खाली हो चुका है। 1964 से लगातार आपदा की मार झेल रहे इस गांव की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए गए। आखिरकार लोगों ने इस गांव में रहने का इरादा ही छोड़ दिया। एक समय में गांव में 75 परिवार रहते थे। अब मात्र तीन परिवार रह गए हैं। रामगंगा हर साल गांव को नुकसान पहुंचा रही है। इस वर्ष भी नदी की चपेट में आकर काफी जमीन बह गई।

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लाछुली गांव में शीतकाल में मुनस्यारी के जलथ गांव से आकर लोग बसते थे। अक्तूबर में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड का असर होते ही लोग घाटी में बसे लाछुली गांव में आकर रहने लगते। गांव के लोगों की जलथ और लाछुली दोनों गांवों में संपत्ति है। 1964 में रामगंगा का प्रवाह पलट जाने के कारण गांव को काफी नुकसान पहुंचा। लोगों ने सुरक्षा की मांग की, लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। 2009 में फिर गांव आपदा की चपेट में आ गया। 2013 की आपदा में गांव को भारी नुकसान पहुंचा। 2013 की आपदा के बाद खतरे से घिरे परिवारों ने एक-एक कर गांव छोड़ना शुरू कर दिया।
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कई परिवार मुनस्यारी, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, देहरादून जाकर बस गए। इस समय गांव में लक्ष्मण सिंह रावत, पुष्कर सिंह रावत और जगदीश सिंह रावत के परिवार रहते हैं। इन परिवारों ने भी तेजम कस्बे में अपने लिए मकान बना रखे हैं। वह कभी-कभार जमीन और मकानों की देखरेख के लिए गांव जाते हैं। एक समय में चहल-पहल से भरा लाछुली गांव अब वीरान हो गया है।
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पिछले साल बंद हो गया जूनियर हाइस्कूल 
छात्र संख्या शून्य होने के कारण लाछुली जूनियर हाइस्कूल 2016 में बंद हो गया। विद्यालय में तैनात तीन शिक्षकों को विभाग ने अन्य स्कूलों में समायोजित कर दिया है। गांव के लक्ष्मण सिंह रावत ने बताया कि जूनियर हाइस्कूल में पढ़ने वाले बच्चे नहीं हैं। विद्यालय भवन भी धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होने लगा है।

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