फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Kumaoni, created to promote Hindi Library

कुमाऊंनी, हिंदी को बढ़ावा देने को बनाई लाइब्रेरी

Sun, 11 Sep 2016 10:37 PM IST
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़। Updated Sun, 11 Sep 2016 10:37 PM IST
विज्ञापन
Kumaoni, created to promote Hindi Library
डा. पीतांबर अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

कुछ लोगों को पढ़ने, लिखने का शौक होता है और कुछ ऐसे होते हैं जो किताबों का संग्रह कर लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। 2003 में कुछ गिनी-चुनी पुस्तकों के साथ ज्ञानप्रकाश पुस्तकालय की स्थापना करने वाले शिक्षक डा. पीतांबर अवस्थी के पास इस समय 20 हजार किताबों का संग्रह हो गया है।

विज्ञापन


जीआईसी गोरंगचौड़ में कार्यरत डा. अवस्थी के पिथौरागढ़ नगर के बजेटी मोहल्ले में स्थित पुस्तकालय में कुमाऊंनी, हिंदी साहित्य के अलावा संस्कृत की भी कई पुस्तकें हैं। डा. पीतांबर ने बिना किसी आर्थिक सहायता के यह पुस्तकालय स्थापित किया। वह जिन शहरों में जाते हैं, वहां से दो-चार पुस्तकें जरूर खरीदकर ले आते। वह कहते हैं कि यह पुस्तकालय शोध छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है। शोधकार्य के लिए कई संदर्भ ग्रंथ उनको मिल जाते हैं। वैसे तो यहां सरकारी तौर पर भी पुस्तकालय हैं, लेकिन डा. अवस्थी के पुस्तकालय में कुछ बेहतरीन किताबों का संकलन है।
विज्ञापन


उसमें कुमाऊं के आदिकवि लोकरत्न पंत गुमानी से लेकर शेखर जोशी का कोसी का घटवार, शेर सिंह अनपढ़ की मेरि लटिपटि, देवसिंह पोखरिया का न्योली संग्रह, मृणाल पांडे का पटरंगपुर पुराण, मनोहर श्याम जोशी का कसप, कैलाश चंद्र लोहनी की उमिलाकि पछ्याण, डा. राम सिंह की कालीकुमाऊं की रागभाग, डा. मदन चंद्र भट्ट का कुमाऊं का इतिहास, डा. शेखर पाठक द्वारा संपादित पहाड़ पत्रिका के हर अंक शामिल हैं। यदि कुमाऊं के साहित्यकारों की रचनाओं को एक ही साथ प्राप्त करना हो तो ज्ञानप्रकाश पुस्तकालय में मिल जाएंगी। इसमें डा. दिवा भट्ट, हयात सिंह रावत, डुंगर सिंह ढकरियाल, शेर सिंह पांगती, उर्वादत्त उपाध्याय की किताबें भी रखी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


डा. अवस्थी ने जितना महत्व कुमाऊं के लेखकों को दिया है, उतना ही हिंदी के लेखकों को भी सम्मान दिया है। उनके पुस्तकालय में चंद्रधर शर्मा गुलेरी, हरिशंकर परसाई, जयशंकर प्रसाद, हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिवंश राय बच्चन से लेकर केदारनाथ अग्रवाल, भवानीप्रसाद मिश्र, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाएं भी मौजूद हैं। डा. अवस्थी कहते हैं कि किताबें जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। लोगों को चाहिए कि वह घर पर अपने संसाधनों के अनुसार छोटा सा पुस्तकालय जरूर बनाएं। इससे बच्चों में पढ़ने की ललक जागेगी और साहित्य का प्रचार होगा। वह कहते हैं कि भविष्य में भी किताबों का संग्रह करेंगे और अपने पुस्तकालय को उच्च स्तर का बनाने का प्रयास भी करेंगे। उनके पुस्तकालय में रोजाना बड़ी संख्या में अध्येता, विद्यार्थी, शोधार्थी आते रहते हैं। हर महीने कवि सम्मेलन होते हैं। उसमें हिंदी और कुमाऊंनी को आगे बढ़ाने पर चर्चा भी होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed