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अब भारतीय क्षेत्र से ही सकेंगे कैलास के दर्शन
केबी पाल/कालिका रावल/अमर उजाला, अस्कोट/पिथौरागढ़
Updated Sun, 04 Sep 2016 09:57 PM IST
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लिपुपास के निकट बांयापास से दिखता कैलास पर्वत
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय क्षेत्र से भी अब कैलास और ऊं पर्वत के स्पष्ट दर्शन हो सकेंगे। यह संभव है हाल में पता चले व्यासघाटी स्थित बायांपास टॉप से, जो चीन सीमा लिपुपास से मात्र ढाई किलोमीटर दूर बाईं ओर स्थित है। यही नहीं, बांयापास से तिब्बत की सड़कें भी साफ दिखाई देती हैं।
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लोनिवि की टीम को मार्च में उस वक्त बायांपास का पता चला जब वह कैलास यात्रा मार्ग का जायजा लेने गई थी। इस टीम ने लोनिवि के सहायक अभियंता गोविंद सिंह जनौटी को इस अद्भुत स्थल के बारे में बताया जिन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद लोनिवि सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी के दिशा-निर्देश पर 11 अगस्त को अधिशासी अभियंता आनंद बल्लभ कांडपाल के नेतृत्व में अस्कोट लोनिवि डिवीजन का दल बायांपास गया।
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सर्वे कर बायांपास से लौटे अधिशासी अभियंता कांडपाल ने बताया कि बायांपास से ऊं पर्वत बिल्कुल पास में दिखाई देता है। कैलास पर्वत के भी यहां से दर्शन होते हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बायांपास को विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। ट्रैकिंग रूट बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। एक साल के भीतर बायांपास तक ट्रैकिंग रूट बन जाएगा। उन्होंने बताया कि दारमा वैली में रामा से रामाकुंड 5 किमी पैदल मार्ग, नागलिंग से व्यासी ग्लेशियर तक ट्रैकिंग रूट बनाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। ट्रैकिंग रूट पर हटों का भी निर्माण किया जाना है।
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लिमस्याधूरा से तीन धामों के दर्शन
छोटा कैलास मार्ग पर पड़ने वाले ज्योलिंगकांग से 18 किमी ऊपर पार्वती मुकुट के पास लिमस्याधूरा नामक स्थान से आदि कैलास, ऊं पर्वत और कैलास पर्वत के दर्शन होते हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता आनंद बल्लभ कांडपाल ने बताया कि इस रूट का भी सर्वे किया गया। यह काफी दुर्गम है। इसलिए बायांपास को प्राथमिकता दी गई। भविष्य में लिमस्याधूरा को भी विकसित करने की सरकार की योजना है।