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Kafal Fruit Uttarakhand: जनवरी में पका काफल, एक साल में तीन बार आए फल; ग्लोबल वार्मिंग का दिखा असर
Thu, 30 Jan 2025 02:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 30 Jan 2025 02:43 PM IST
सार
काफल पकने का मौसम चैत यानि अप्रैल महीना है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते गंगोलीहाट में जनवरी महीने में ही काफल पक गए हैं। यहां तक कि पेड़ों में एक साल के भीतर तीन बार फल आए हैं इससे पर्यावरण प्रेमी भी हैरत में हैं।
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काफल
विस्तार
प्रसिद्ध कुमाऊंनी गीत काफल पाको चैत मेरी छैला... आज भी हर जुबान पर गूंजता है। गीत से साफ जाहिर है कि काफल पकने का मौसम चैत यानि अप्रैल महीना है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते गंगोलीहाट में जनवरी महीने में ही काफल पक गए हैं। यहां तक कि पेड़ों में एक साल के भीतर तीन बार फल आए हैं इससे पर्यावरण प्रेमी भी हैरत में हैं।
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मौसम में बदलाव पहाड़ों के प्रसिद्ध फल काफल पर भी पड़ा है। गंगोलीहाट नगर से तीन किमी दूर दशाईथल-आंवलाघाट सड़क पर लोहारकट्टा के जंगल में जनवरी में 18 डिग्री तापमान के बीच काफल से लदे पेड़ इसका प्रमाण हैं। क्षेत्र में काफल के पेड़ों में बीते अप्रैल, इस साल अगस्त और अब जनवरी महीने में काफल पके हैं।
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यही हाल पाताल भुवनेश्वर को जोड़ने वाली सड़क पर जीबलघाटी में भी है। पर्यावरण प्रेमियों की मानें तो आम तौर पर काफल चैत यानि अप्रैल महीने में पकता है। समय से पूर्व फल आना और इसका पकना सिर्फ पर्यावरण असंतुलन का प्रतीक है।
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प्रकृति प्रेमी सुरेंद्र बिष्ट के मुताबिक माल्टा, नींबू, काफल सहित अन्य पेड़ साल में दो बार भी फल देते हैं। काफल में तीसरी बार फल आना समझ से परे है। डॉ. लोकेश डसीला ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन के चलते वर्तमान में दौर में पेड़ बेमौसमी फल देने लगे हैं। इन फलों में पोषक तत्वों की कमी रहती है। डॉ. जेएन पंत ने कहा कि बेमौसमी फल कम रसीले होते हैं लेकिन इन्हें खाने में कोई नुकसान नहीं होता।