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छोटे पर्दे पर धमाल मचा रहा पिथौरागढ़ का जितेंद्र
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 05 Mar 2017 10:13 PM IST
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कलाकार जितेंद्र बोहरा
- फोटो : अमर उजाला
हौसला इंसान को कामयाब बनाने में मददगार साबित होता है। कुछ ऐसी ही कहानी है पिथौरागढ़ के छोरे जितेंद्र बोहरा (जीतू) की। बनीगांव (सौनपट्टी) के रिटायर्ड फौजी जीवन सिंह बोहरा के सुपुत्र जीतू मायानगरी मुंबई की फिल्मी दुनिया में अपने दम पर आगे बढ़ रहे हैं। क्राइम पेट्रोल दस्तक, सीआईडी, महाराणा प्रताप सरीखे सीरियलों में काम करने के बाद जीतू अब लाइफ ओके के प्रेम पहेली चंद्रकांता सीरियल में नाजिम अय्यार के रोल में दिखाई देंगे।
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27 अक्तूबर 1990 को जन्मे जितेंद्र बोहरा के भीतर मौजूद एक्टिंग ही उन्हें मायानगरी ले गई। बचपन से ही अभिनय और नृत्य में रुचि रखने वाले जीतू ने वर्ष 2010 में अभिनय का कोर्स किया। वर्ष 2011 में वह पिथौरागढ़ महाविद्यालय में बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई बीच में ही छोड़कर मुंबई चले गए। काफी जद्दोजहद के बाद क्राइम पेट्रोल दस्तक, सावधान इंडिया, सीआईडी में छोटे-मोटे रोल मिले। महाराणा प्रताप सीरियल से बड़ा ब्रेक मिला। इसके बाद पिछले साल अशोका, अम्मा सीरियलों में अभिनय से लोहा मनवाने वाले जीतू को अब लाइफ ओके के सीरियल चंद्रकांता में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। चंद्रकांता में जीतू नाजिम अय्यार के रोल में लोगों को गुदगुदाते नजर आएंगे।
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जीतू को चंद्रकांता से काफी उम्मीद है। जीतू कहते हैं, महाराणा प्रताप और अशोका में किया अभिनय मुकाम बनाने में मददगार साबित हो रहा है। चंद्रकांता उनके लिए और मौके लेकर आएगा। वह कहते हैं कि मायानगरी में मुकाम बनाना बेहद मुश्किल है। हार न मानने की कला ही मुंबई में कामयाबी के रास्ते खोलती है। चंद्रकांता सीरियल शनिवार और रविवार को रात 9 बजे प्रसारित होता है।
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फुटपाथ पर अखबार बिछाकर सोना पड़ा
अभिनय की दुनिया में कदम रखने के लिए मुंबई गए जीतू को वहां कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। फोन पर हुई बातचीत में जीतू ने संघर्ष के दिनों की यादें साझा की। बकौल जीतू मुंबई पहुंचा तो वहां अपना कोई नहीं था। एक कमरे में पांच दोस्त रहते थे। मुंबई में अकेले कमरा किराए पर लेना संभव नहीं था। कहते हैं कि दोस्तों से धोखा मिला। कमरा छोड़ दिया। स्टेशन, फुटपाथ पर अखबार बिछाकर सोया करता था। खुले आसमान के नीचे बरसात में भारी दिक्कत होती थी। काम मिलता गया तो हालात भी सुधरने लगे। वह अपनी कामयाबी में पिता के साथ ही मां जानकी बोरा का अहम योगदान मानते हैं। जीतू कहते हैं कि गांव और पिथौरागढ़ को बहुत याद करता हूं।