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टनकपुर-जौलजीबी सड़क निर्माण की उम्मीद बंधी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 23 Jan 2015 11:47 PM IST
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टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर वन विभाग ने गतिविधि तेज कर कर दी है। 145 किलोमीटर लंबे इस मोटर मार्ग में पड़ रही वन भूमि के निस्तारण के मामलों की जांच के लिए शुक्रवार को भारत सरकार के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के वन संरक्षक एमएस नेगी ने जौलजीबी से आगे के इलाके का भ्रमण किया। इसी इलाके में सड़क प्रस्तावित है।
टनकपुर से लेकर जौलजीबी तक इस सड़क में पूरा इलाका वन भूमि के अधीन आ रहा है। जब तक वन भूमि के मामलों का निस्तारण नहीं होगा, तब तक सड़क का निर्माण संभव नहीं होगा। महाकाली के किनारे बनने वाली इस सड़क को केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना में शामिल किया है।
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पहले डौड़ा तक आठ किलोमीटर के दायरे में वन भूमि के मामलों का निस्तारण हो गया था और जौलजीबी से डौड़ा तक आठ किलोमीटर सड़क का निर्माण भी हो गया है। उससे आगे पीपली, झूलाघाट, पंचेश्वर, चूका होते हुए टनकपुर तक जाने वाली इस सड़क में वन भूमि आड़े आ रही है। इसी कारण इस महत्वाकांक्षी सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वन रेंजर अल्मिया ने बताया कि रिपोर्ट अब भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दी जाएगी। उसके बाद उम्मीद है कि मामलों का निस्तारण होने के बाद सड़क का निर्माण तेजी से हो जाए।
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टनकपुर से लेकर जौलजीबी तक इस सड़क में पूरा इलाका वन भूमि के अधीन आ रहा है। जब तक वन भूमि के मामलों का निस्तारण नहीं होगा, तब तक सड़क का निर्माण संभव नहीं होगा। महाकाली के किनारे बनने वाली इस सड़क को केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना में शामिल किया है।
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वन रेंजर बीएस अल्मिया ने वन संरक्षक के साथ जौलजीबी, डौड़ा समेत तमाम इलाकों का दौरा किया। बताया गया गया है कि टनकपुर से जौलजीबी तक 145 किलोमीटर के दायरे में जहां पर यह सड़क प्रस्तावित है वह सारी जमीन वन भूमि के अधीन आ रही है।
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पहले डौड़ा तक आठ किलोमीटर के दायरे में वन भूमि के मामलों का निस्तारण हो गया था और जौलजीबी से डौड़ा तक आठ किलोमीटर सड़क का निर्माण भी हो गया है। उससे आगे पीपली, झूलाघाट, पंचेश्वर, चूका होते हुए टनकपुर तक जाने वाली इस सड़क में वन भूमि आड़े आ रही है। इसी कारण इस महत्वाकांक्षी सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वन रेंजर अल्मिया ने बताया कि रिपोर्ट अब भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दी जाएगी। उसके बाद उम्मीद है कि मामलों का निस्तारण होने के बाद सड़क का निर्माण तेजी से हो जाए।