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जंगल से वन संपदा का नहीं करेंगे दोहन

Tue, 30 Apr 2019 10:34 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला ,गंगोलीहाट/पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला ,गंगोलीहाट/पिथौरागढ़। Published by: kamlesh kamlesh Updated Tue, 30 Apr 2019 10:34 PM IST
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jangal se van sampada ka dohan nahin hoga
कोटगाड़ी को जंगल चढ़ाने ध्वजा के साथ मंदिर पहुंचे चौप्यूड़ा के लोग। - फोटो : पिथौरागढ़

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अंधाधुंध कटान से आजिज आकर चौप्यूड़ा के लोगों ने वन पंचायत चौप्यूड़ा का जंगल 10 साल के लिए न्याय की देवी मां कोटगाड़ी को चढ़ा दिया है।

कई कोशिशों के बाद भी चौप्यूड़ा वन पंचायत के जंगल से कटान नहीं रुका तो गांव के लोगों ने आपस में बैठक कर जंगल को 10 साल के लिए न्याय की देवी कोटगाड़ी देवी को चढ़ाने का फैसला लिया। मंगलवार को गांव के लोग ध्वजा और जंगल को देवी चढ़ाने के लिए बनाया गया शपथ पत्र लेकर पांखू स्थित मां कोटगाड़ी के दरबार पहुंचे। लोगों ने शपथ पत्र मंदिर में चढ़ा दिया। चौप्यूड़ा निवासी हरीश सिंह, भूपाल सिंह ने बताया कि गांव के लोगों ने अगले 10 साल तक जंगल से वन संपदा का दोहन न करने का संकल्प लिया है। इस दौरान जो भी जंगल का दोहन करेगा। वह स्वयं ही इसके लिए जिम्मेदार रहेगा। जंगल में कोटगाड़ी देवी की ध्वजा टांग दी गई है।


 मां कोटगाड़ी की न्याय की देवी के रूप में मान्यता है। लोग मां के दरबार में न्याय के लिए अर्जी लगाते हैं। सीमांत जिले में जंगल मां कोकिला को चढ़ाने का सिलसिला 1999-2000 से चल रहा है। सबसे पहले गंगोलीहाट तहसील के चिटगल गांव के वन पंचायत सरपंच जानकी बल्लभ पंत ने 10 साल के लिए चिटगल का जंगल कोटगाड़ी देवी को चढ़ाया दिया था। कोटगाड़ी देवी को जंगल चढ़ाने से जंगल से अवैध दोहन रुक गया। इसके बाद जिलेभर में जंगल को कोटगाड़ी देवी को चढ़ाने का सिलसिला ही शुरू हो गया। अब तक गंगोलीहाट, जिला मुख्यालय, नाचनी समेत तमाम इलाके के लोग जंगलों को बचाने के लिए भगवती कोटगाड़ी की शरण में जा चुके हैं।
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