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यूरेशियन प्लेट के बढ़ते दबाव से बढ़ रही हिमालय की ऊंचाई
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट
Updated Fri, 13 May 2016 10:27 PM IST
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भूवैज्ञानिक प्रो. वल्दिया
- फोटो : अमर उजाला
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हिमालयन ग्राम विकास समिति के सभागार में चल रहे तीन दिनी साइंस आउटरिच कार्यक्रम के समापन पर भू-वैज्ञानिक पद्मभूषण प्रोफेसर केएस वल्दिया ने हिमालय के उद्भव और विकास पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा यूरेशियन प्लेट के लगातार बढ़ते दबाव से हिमालय की ऊंचाई बढ़ रही है। उन्होंने भूगर्भीय दरारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पृथ्वी प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल ही भूकंप और बड़े भूस्खलन का कारण बनती है।
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प्रोफेसर वल्दिया ने कहा कि यदि प्लेटों के बीच तनाव बढ़ जाता है तो बड़े भूकंप आते हैं। उन्होंने बड़े भूकंपों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रदेश के सीमांत जिले भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। ये जिले भूगर्भीय दरारों पर स्थित हैं। जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के प्रोफेसर उमेश बाघमरे ने सरल प्रयोगों की सहायता से तरंग और इनकी प्रकृति के संबंध में जानकारी दी। सोच को विकसित करने और लगातार प्रश्न पूछते रहने का आह्वान किया। आईआईटी मुंबई के वैज्ञानिक प्रोफेसर कंचन पांडे ने पूर्व वर्षों में पृथ्वी के तापमान को जानने के सिद्धांत पर जानकारी दी। समाजसेवी राधा बहन ने कहा कि अब तक आपने विज्ञान पढ़ते हुए ऊर्जा का व्यापक अध्ययन किया परंतु इन सब में मानव ऊर्जा सर्वोपरि है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कमान सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय में तैयार किए गए आवृतसारिणी को नए स्वरूप में सामने रखा। फास्टफूड को घर पर जांचने के गुर सिखाए। दिव्या पाठक ने एकल अभिनय गोपुली बुआ की प्रस्तुति दी। संस्थाध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने प्रोफेसर केएस वल्दिया, प्रोफेसर शेखर पाठक, समाजसेवी राधा बहन का शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के एसएस वल्दिया, प्रोफेसर बीडी लखचौरा, प्रोफेसर गंगा बिष्ट, बीएस कोरंगा, लक्ष्मी बाई स्वायत्त सहकारिता, कामधेनु स्वायत्त सहकारिता के प्रतिनिधि मौजूद थे। संचालन पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पाठक ने किया।
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