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Pithoragarh News: भगवान शिव के प्राचीन निवास स्थल को देखना है तो आइए आदि कैलाश
Fri, 17 May 2024 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 17 May 2024 11:10 PM IST
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आदि कैलाश यात्रा की तस्वीर।
- फोटो : नैनीताल में बृहस्पतिवार को तल्लीताल क्षेत्र में चहलकदमी करते पर्यटन। संवाद
पिथौरागढ़। देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवताओं का वास है। गढ़वाल में चार धाम हैं तो कुमाऊं में आदि कैलाश और ओम पर्वत हैं। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश को वैश्विक पहचान मिली है। आदि कैलाश हिमालय का वह पवित्र स्थल है जहां भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते थे। इस स्थल का उल्लेख स्कंद पुराण में भी है।
पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में गुंजी से लगभग 42 किमी की दूरी पर आदि कैलाश स्थित है। आदि कैलाश का महत्व भी कैलाश के बराबर का ही माना जाता है। कैलाश पर्वत में मानसरोवर झील है तो आदि कैलाश में पार्वती सरोवर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार आदि कैलाश को भगवान भोलेनाथ का प्राचीन निवास स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर जब माता पार्वती से विवाह कर कैलाश जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर प्रवास किया था। भगवान शंकर और माता पार्वती अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के साथ भी इस स्थान पर लंबे समय तक रहे। आज भी आदि कैलाश में माता पार्वती के नाम पर पार्वती सरोवर है। माता पार्वती ने इस स्थान पर धान लगाए थे। आज भी इस स्थल पर स्वयं ही धान उगते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान भगवान शिव को बेहद प्रिय है।
..........इनसेट..........
पार्वती सरोवर के समीप वर्ष 1971 में बनाया था शिव-पार्वती मंदिर
पिथौरागढ़। 14,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकांग में आदि कैलाश स्थित है। आदि कैलाश पर्वत के ठीक नीचे नंदा कुंड जबकि कुछ दूरी पर पार्वती सरोवर है। इसी पार्वती सरोवर के समीप शिव पार्वती मंदिर है। इस मंदिर की नींव 1971 में कुटी गांव के तीन लोगों श्रीकृष्ण सिंह कुटियाल, जय सिंह कुटियाल और केदार सिंह कुटियाल ने रखी थी। मंदिर के कपाट मई में खुलते हैं और बर्फबारी शुरू होने के बाद बंद हो जाते हैं। आदि कैलाश रं समाज के लोगों का प्रमुख तीर्थ भी है। संवाद
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पांडव भी रुके थे आदि कैलाश में
पिथौरागढ़। आदि कैलाश में आदि कैलाश पर्वत, पार्वती सरोवर, नंदा कुंड के अलावा गणेश पर्वत, कुंती पर्वत, पांडव पर्वत भी हैं। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव भी यहां आए थे। कुंती के नाम से एक गांव कुटी भी है। यह गांव भारत का अंतिम गांव है। गुंजी से कुटी गांव की दूरी 18 किमी है। कुटी से आदि कैलाश 12 किमी दूर है। संवाद
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पार्वती सरोवर के समीप है ध्यान स्थल
पिथौरागढ़। आदि कैलाश पर्वत के ठीक सामने जहां पर पार्वती सरोवर है। उसी स्थल पर स्थित शिव पार्वती मंदिर के समीप एक ध्यान स्थल भी है। पिछले वर्ष 12 अक्तूबर को आदि कैलाश आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी स्थल पर ध्यान लगाया था। संवाद
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दर्शनीय स्थलों से भरी है पूरी व्यास घाटी
पिथौरागढ़। आदि कैलाश स्थित व्यास घाटी में कई दर्शनीय स्थल हैं। ओम पर्वत भी इन्हीं में शामिल है। ओम पर्वत के लिए गुंजी से लिपुलेख मार्ग पर जाना होता है। ओम पर्वत 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्वत नाभीढांग से देखा जा सकता है। इसके अलावा महाकाली नदी का उद्गम स्थल कालापानी, व्यास गुफा भी इसी घाटी में स्थित हैं। धारचूला से लगभग 140 किमी लंबे इस मार्ग में यात्रा के दौरान नेपाल के हिमालय के दर्शन भी बेहद नजदीक से होते हैं।
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पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में गुंजी से लगभग 42 किमी की दूरी पर आदि कैलाश स्थित है। आदि कैलाश का महत्व भी कैलाश के बराबर का ही माना जाता है। कैलाश पर्वत में मानसरोवर झील है तो आदि कैलाश में पार्वती सरोवर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार आदि कैलाश को भगवान भोलेनाथ का प्राचीन निवास स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर जब माता पार्वती से विवाह कर कैलाश जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर प्रवास किया था। भगवान शंकर और माता पार्वती अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के साथ भी इस स्थान पर लंबे समय तक रहे। आज भी आदि कैलाश में माता पार्वती के नाम पर पार्वती सरोवर है। माता पार्वती ने इस स्थान पर धान लगाए थे। आज भी इस स्थल पर स्वयं ही धान उगते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान भगवान शिव को बेहद प्रिय है।
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पार्वती सरोवर के समीप वर्ष 1971 में बनाया था शिव-पार्वती मंदिर
पिथौरागढ़। 14,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकांग में आदि कैलाश स्थित है। आदि कैलाश पर्वत के ठीक नीचे नंदा कुंड जबकि कुछ दूरी पर पार्वती सरोवर है। इसी पार्वती सरोवर के समीप शिव पार्वती मंदिर है। इस मंदिर की नींव 1971 में कुटी गांव के तीन लोगों श्रीकृष्ण सिंह कुटियाल, जय सिंह कुटियाल और केदार सिंह कुटियाल ने रखी थी। मंदिर के कपाट मई में खुलते हैं और बर्फबारी शुरू होने के बाद बंद हो जाते हैं। आदि कैलाश रं समाज के लोगों का प्रमुख तीर्थ भी है। संवाद
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पांडव भी रुके थे आदि कैलाश में
पिथौरागढ़। आदि कैलाश में आदि कैलाश पर्वत, पार्वती सरोवर, नंदा कुंड के अलावा गणेश पर्वत, कुंती पर्वत, पांडव पर्वत भी हैं। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव भी यहां आए थे। कुंती के नाम से एक गांव कुटी भी है। यह गांव भारत का अंतिम गांव है। गुंजी से कुटी गांव की दूरी 18 किमी है। कुटी से आदि कैलाश 12 किमी दूर है। संवाद
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पार्वती सरोवर के समीप है ध्यान स्थल
पिथौरागढ़। आदि कैलाश पर्वत के ठीक सामने जहां पर पार्वती सरोवर है। उसी स्थल पर स्थित शिव पार्वती मंदिर के समीप एक ध्यान स्थल भी है। पिछले वर्ष 12 अक्तूबर को आदि कैलाश आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी स्थल पर ध्यान लगाया था। संवाद
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दर्शनीय स्थलों से भरी है पूरी व्यास घाटी
पिथौरागढ़। आदि कैलाश स्थित व्यास घाटी में कई दर्शनीय स्थल हैं। ओम पर्वत भी इन्हीं में शामिल है। ओम पर्वत के लिए गुंजी से लिपुलेख मार्ग पर जाना होता है। ओम पर्वत 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्वत नाभीढांग से देखा जा सकता है। इसके अलावा महाकाली नदी का उद्गम स्थल कालापानी, व्यास गुफा भी इसी घाटी में स्थित हैं। धारचूला से लगभग 140 किमी लंबे इस मार्ग में यात्रा के दौरान नेपाल के हिमालय के दर्शन भी बेहद नजदीक से होते हैं।