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खल तव कठिन वचन मैं सहहूं 

Sat, 12 Nov 2016 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 12 Nov 2016 10:28 PM IST
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I really mean that hard word Shhun
खल तव कठिन वचन मैं सहहूं  - फोटो : अमर उजाला
 जाख और बुंगाछीना की रामलीला में अंगद-रावण संवाद तो मुवानी की रामलीला में राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। 
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जाख और बुंगाछीना की रामलीला में समुद्र में पुल बांधने के बाद युवराज को दूत बनाकर लंका भेजा जाता है। राजदरबार में रावण अंगद से परिचय पूछता है। अंगद अपना परिचय देते हुए सीता माता को भगवान राम को सौंपने की सलाह देते हैं। रावण कहता है-खल तव कठिन वचन मैं सहहूं, नीति धर्म सब जानत रहहूं, राजनीति यह वचन पुकारे, रिपु कर दूत कोउ न मारे, रे कपि अधम मरण अब चहंसी, छोटे वदन बात बड़ कहसी।

 बुंगाछीना की रामलीला में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि रामलीला नेक रास्ते पर चलने का मार्ग दिखाती है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया। 
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मुवानी की रामलीला में राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। दशरथ की भूमिका हरीश उप्रेती, राम कपिल बोरा, सीता कमल मनोला, लक्ष्मण गौरव बोरा, सुमंत ललित शार्य थे।
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